ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के आत्मीयजनों से चर्चा

15 फ़रवरी 2022 का ज्ञानप्रसाद – ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के आत्मीयजनों से चर्चा

आज यह चर्चा हम 25  दिन के उपरांत का रहे हैं, अगर हमारे हाथ में हो तो हम तो रोज़ ही अपने आत्मीयजनों से बातचीत कर लिया करें लेकिन गुरुकार्य सर्वोपरि है, उससे ऊपर और कुछ भी नहीं है।  हालाँकि कमैंट्स और काउंटर कमैंट्स के माध्यम से भी कुछ न कुछ चर्चा तो होती ही रहती है लेकिन Plan of action, कार्य का अपडेट, नई योजनाएं इसी  सेक्शन में हो सकती हैं। 

अनुभूतियों की  श्रृंखला को अविश्वसनीय सहयोग मिलना हम सबके  लिए एक गर्व की बात है। इतने छोटे से परिवार के लिए सामूहिक तौर पर  3000 के लगभग कमैंट्स,  600  बेसिक कमेंटस  और 1000  के लगभग लाइक्स मिलना कोई साधारण बात नहीं है।  कमैंट्स इतने विषय-आधारित कि कोई भी पढ़कर बता सकता है कि लेख का गूढ़ अध्ययन करने के बाद  ही एक परिश्रमी विद्यार्थी की तरह assignment के रूप में तैयार  किया गया है। अगर हम विस्तृत और बड़े कमेंटस की तरफ दृष्टि दौड़ाएं तो 3000 से कहीं अधिक बना जाते हैं। यह तो हुई गिनती की बात, अगर कंटेंट की बात करें तो सभी बड़े कमेंट भावनाओं से, ज्ञान से, शिक्षा से ,मार्गदर्शन से  ओतप्रोत हैं। जो परिजन आज इतने बड़े कमेंट लिखकर अपना ह्रदय हम सबसे शेयर कर रहे हैं, “जय गुरुदेव ,धन्यवाद्” जैसे कमेंट से ही हमारे साथ  जुड़े थे।  प्रेरणा बिटिया जैसे सहकर्मी तो कितनी देर तक अपना नाम बताने में भी झिझकते रहे और पापा के फ़ोन ID Lalan Prasad से ही कमेंट करते रहे। हमारे विचार में  ऐसा करना उचित भी है क्योंकि जब तक आप किसी पर  विश्वास नहीं कर लेते अपना ह्रदय खोलना उचित नहीं है। हम सबकी यह  धारणा आये दिन सोशल मीडिया साइट्स की बातें सुन- सुन कर ही बनी है। तभी तो किसी ने फेसबुक के CEO, Mark Zuckerberg को नाम बदल कर फ़ेकबुक रखने का सुझाव दिया था। Mark ने तो हमें इतना अच्छा प्लेटफॉर्म  दिया लेकिन हम सबने इसका क्या से क्या कर दिया किसी से छुपा नहीं है।

ऑनलाइन ज्ञानरथ के स्टार प्रचारक:

जिन  12  परिजनों  के चित्र हम आठ अनुभूति  लेखों के साथ लगाते  रहे, असल में ऑनलाइन ज्ञानरथ के स्टार प्रचारक हैं। यह स्टार प्रचारक बिल्कुल उसी प्रकार अपना कर्तव्य निभाते हुए मार्गदर्शन प्रदान कर रहे हैं जैसे आर्मी के उच्च अधिकारी करते हैं। आर्मी में उच्च अधिकारीयों का मार्गदर्शन ही बाकि की सेना को प्रेरित और प्रोत्साहित करता है। इन सभी स्टार प्रचारकों को  हमारी व्यक्तिगत एवं सामूहिक बधाई। 

रेनू श्रीवास्तव बहिन जी ने हमारे स्वास्थ्य और समय की चिंता करते हुए कई बार कमैंट्स की चिंता न करने का  सुझाव  दिया है। इस अपनत्व और स्नेह के लिए बहिन जी का धन्यवाद् करते हैं लेकिन ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के एक -एक सदस्य के साथ हमारा आत्मिक सम्बन्ध है।  हम सब आत्मा के अटूट बंधन से एक  पवित्र माला के मोतियों की तरह जुड़े हुए हैं। जहाँ आत्मा का सम्बन्ध होता है वहां अपने-बेगाने का कोई अस्तित्व नहीं होता, होता है तो केवल समर्पण और बलिदान। अनुभूतियाँ लिखने के उपरांत यह अपनतत्व इस स्तर का हो गया है कि जब किसी का कमेंट देख रहे होते हैं ऐसा लगता है कि आमने सामने बात हो रही है क्योंकि पिक्चर जो देखि हुई है।    

हमारे सहकर्मी बार-बार ऑनलाइन ज्ञानरथ की उन्नति के लिए हमें श्रेय दिए जा रहे हैं लेकिन असल में  ऐसी बात है ही नहीं। वैसे  तो किसी को भी श्रेय देने की बात नहीं सोचनी  चाहिए क्योंकि सब अपना-अपना कार्य कर रहे हैं, वह कार्य जो हमारे गुरु ने बहुत ही सोच-विचार करने के उपरांत हमें हमारी क्षमता-पात्रता  के आधार पर दिया है। हम तो यह भी नहीं कहेंगें कि  हम गुरु का कार्य कर रहे हैं, गुरु के पास तो कार्यकर्ताओं को फौज उपलब्ध है। हम केवल और केवल अपनी आत्मिक मानसिक शांति के लिए अपना कर्तव्य निभा रहे हैं। ज़रा उन  परिजनों का  मानसिक लेवल चेक करके तो देखो,स्वयं अनुभव कर लोगे कि इस पुनीत कार्य में योगदान देकर  कितने प्रसन्न हैं।  हाँ अगर हमने किसी को श्रेय देना  ही  हो तो केवल  दो को ही दिया जा सकता है एक -परमपूज्य गुरुदेव को  और दूसरे  हमारे निष्ठावान, समर्पित सहकर्मी,परिवारजनों को । आदर्श परिवार पर  आधारित लेखों के माध्यम से सरविन्द जी ने अभी कुछ समय पहले ही हमें परिवार की परिभाषा का  अमृतपान करवाया था।

कल वाले कमैंट्स में गुरुऋण और गुरुदक्षिणा के शब्द बार -बार प्रयोग हुए हैं।  सभी ने बिल्कुल ठीक ही लिखा है – अब गुरुदक्षिणा देने का समय आ गया है। हमारे गुरुदेव हमसे एकलव्य की भांति अंगूठा कटवाने को  तो नहीं कह रहे हैं लेकिन समय का दान ,श्रम कादान, बुद्धि का दान, विवेक का दान करने को कह रहे हैं।  आखिर कौन करेगा अपने गुरु  को दिए वचनों की पूर्ति- केवल हम।    

कमैंट्स लिखना means Catharsis: 

जब हम कमेंट लिखने पर इतना बल देते रहते हैं तो इसका एक ही उदेश्य है कि ऑनलाइन ज्ञानरथ के लेखों को lightly न लिया जाए। यह एक आत्मिक शांति का मार्ग है।  इसका अर्थ कतई नहीं है कि हम अपने लेखों की, audio books की, videos की बढ़ाई कर रहे हैं। हमारे इलावा आपके inbox में प्रतिदिन कितना ही अच्छा मटेरियल आता होगा जो आपको प्रभावित करता होगा लेकिन ज्ञान वह है जो आपके अन्तःकरण को छू जाये, और वह तभी संभव है जब आप उसे ध्यान से पढ़ें। ऐसा ज्ञान जो पढ़ने के बाद आपको इस प्रकार उत्तेजित कर दे कि आप भागे-भागे फिरें कि कोई आपको सुने। इस क्रिया को इंग्लिश में catharsis  यानि vomit out (उलटी करना ) कहा जाता है।  जब तक आप अपनी emotions को किसी से शेयर नहीं कर लेते आपको चैन नहीं मिलता। और आप ऐसा कर रहे हैं- कमैंट्स लिख कर- हमने यह भावना कई कमैंट्स में देखि है। कई बार परिजनों की emotions लिखने के बाद भी  शांत नहीं होती तो एकदम हमें फ़ोन करके शांत  करने का प्रयास करते हैं। यह एक ऐसी  स्थिति  है जिससे हम, आप या कोई भी भाग नहीं  सकता।

आने वाले दिनों की योजनाएं :

1 आने वाली  योजनाओं में सबसे महत्वपूर्ण योजना  संध्या बहिन जी की इन्द्रिय संयम पर आधरित लेखों के श्रृंखला है। मनोनिग्रह लेखों द्वारा हमने 30 चैप्टर्स के ज्ञान से अपने मन को कण्ट्रोल करने के मार्गों पर चर्चा की थी।  अब हम इन्द्रियों (senses ) को कण्ट्रोल करने के मार्ग देखेंगें।  उस परमपिता परमात्मा ने हमें दृष्टि जैसी अमूल्य sense देखने के लिए दी है ,लेकिन यह हम पर, केवल हम पर ही  निर्भर करता है कि हमें क्या देखना है। कुछ इसी   तरह की चर्चा  करेंगीं हमारी संध्या बहिन, of course हम अपने विचार डालते ही जायेंगें,आखिर एडिटर जो ठहरे, और आप कमेंट करके विश्लेषण करेंगें -है न एक सामूहिक दिव्य प्रयास।

2 हमारी प्रेरणा बिटिया ने एक बार फिर 3 ऑडियो बुक्स रिकॉर्ड  करके  भेजी हैं।  इनको भी अपलोड करने की योजना है। 

3. एक और योजना है – गायत्री मंत्र का ब्रह्मास्त्र जैसा प्रभाव।  हिरोशिमा,नागासाकी में  फेंके गए परमाणु बम के साथ गायत्री मन्त्र की तुलना करना बिल्कुल ही unscientific प्रतीत होता है लेकिन हमारे ग्रंथों में इन सबका वर्णन है। हमारे सहकर्मियों को पता है कि  बिना तथ्यों और scientific evidence के हम कौन सा इन बातों पर विश्वास करने वाले हैं।  तो कल देखिये गायत्री मन्त्र की शक्ति जिसके द्वारा एक तिनके को भी ब्रह्मास्त्र बनाया जा सकता है ।  गुरुदेव के कथानुसार यह कोई चमत्कार नहीं बल्कि घोर -अत्यंत कठिन साधना है।  

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चलते चलते :   

1 चलते चलते आपके साथ दो और बातें करने को मन कर रहा है। आज सुबह आँख खुलते ही  विदुषी बंटा जी के कमेंट पर हमने काउंटर कमेंट किया तो पता चला कि बहिन जी रहते तो पठानकोट में हैं लेकिन गरली परागपुर (हिमाचल) से हैं। हमारी निशा बहिन जी भी हिमाचल से हैं। देहरा की बात चल रही थी।  गूगल सर्च करने से पता चला की गरली परागपुर भारत का प्रथम Heritage village है ,दो तीन वीडियोस भी देखीं। आप भी देखें यह गांव बिल्कुल  कलाप गांव की झलक देता है।

2 राजकुमारी कौरव बहिन जी कई दिनों के कमेंट कर रही थीं, व्हाट्सप्प पर कनेक्ट होने में कुछ  समस्या आ रही  थी। Thank God आज जीमेल से कनेक्ट हो गया है।  उन्होंने अपनी  बहुत ही छोटी सी अनुभति भेजी है, उसे भी आपके समक्ष प्रस्तुत करना है। 

हर बार की तरह आज भी कामना करते हैं कि प्रातः आँख खोलते ही सूर्य की पहली किरण आपको ऊर्जा प्रदान करे और आपका आने वाला दिन सुखमय हो। धन्यवाद् जय गुरुदेव

हर बार की तरह आज का लेख भी बड़े ही ध्यानपूर्वक तैयार किया गया है, फिर भी अगर कोई त्रुटि रह गयी हो तो उसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं।

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24 आहुति संकल्प सूची :

13  फ़रवरी 2022 के ज्ञानप्रसाद का अमृतपान करने के उपरांत इस बार आनलाइन ज्ञानरथ परिवार के 4   समर्पित साधकों  ने  24 आहुति  संकल्प पूर्ण किया है। यह समर्पित साधक निम्नलिखित है :

(1 ) अरुण त्रिखा-25,(2 ) अरुण वर्मा -26,(3) सरविन्द कुमार -32,(4 ) प्रेरणा कुमारी-25                          

इस पुनीत कार्य के लिए सभी   युगसैनिक बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं और सरविन्द कुमार जी आज भी  गोल्ड मैडल विजेता हैं। कामना करते हैं कि  परमपूज्य गुरुदेव की कृपा दृष्टि  आपके परिवार पर सदैव बनी रहे। हमारी दृष्टि में सभी सहकर्मी विजेता ही हैं जो अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं,धन्यवाद् जय गुरुदेव


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