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गुरुदेव के अध्यात्मिक जन्म दिवस पर हमारी अनुभूतियों के श्रद्धा सुमन-5 

10 फ़रवरी 2022 का ज्ञानप्रसाद -गुरुदेव के अध्यात्मिक जन्म दिवस पर हमारी अनुभूतियों के श्रद्धा सुमन-5 

हमारे सहकर्मियों की अनुभूतियों का अमृतपान करके अवश्य ही आपका कायाकल्प हो सकता है।

आज का ज्ञानप्रसाद अपने दो समर्पित सहकर्मियों, निशा भरद्वाज और सुनीता शर्मा जी की अनुभूतियाँ हैं। निशा बहिन जी को तो यूट्यूब वाले सहकर्मी भलीभांति जानते हैं लेकिन सुनीता शर्मा व्हाट्सप्प पर सक्रिय हैं। दोनों बहिनों के साथ हमारी एक दो बार फ़ोन से बात भी हुई है जिससे उनके साथ अपनत्व का अटूट बंधन भी जुड़ चुका है। निशा भारद्वाज कितनी ही देर तक प्रीती भारद्वाज नाम से हमारे साथ संपर्क में रहीं। बहुत समय के बाद निशा जी ने अपना फ़ोन नंबर देते समय बताया कि प्रीती उनकी बेटी है। उनका एक आज्ञाकारी बेटा अभिषेक है। दोनों बच्चे अत्यंत संस्कारी हैं। यह हम इस लिए कह रहे हैं कि जब निशा जी मायके जाती हैं तो कई बार इन दोनों ने संपर्क साधना का दायित्व निभाया है। हम तो सदैव यही कामना करते हैं कि हर परिवार में स्वर्गीय वातावरण बने और हर परिवार एक उदाहरण हो। निशा जी ने अपनी अनुभूति का अंत गुरुगीता के कुछ चैप्टर्स से किया था जिन्हे हमें शब्द सीमा के कारण डिलीट करना पड़ा ,जिसके लिए हम क्षमा प्रार्थी हैं। निशा बहिन लिखती हैं कि उन्होंने गुरुगीता का स्वध्याय रेनू श्रीवास्तव जी के कमेंट से प्रेरित होकर आरम्भ किया था। तो हमारे सहकर्मी अनुभव कर सकते हैं कि comment- counter comment का experiment किस प्रकार सार्थक सिद्ध हो रहा है। इसी प्रकार हमारा अनुभूतिओं का वर्तमान प्रयोग भी कोई कम सार्थक नहीं है। इन सबका श्रेय हमारे समर्पित सहकर्मियों की सहकारिता और सहभागिता को जाता है जिसके लिए हम सदैव ही आभारी रहेंगें। 

सुनीता जी की अनुभूति शायद 32 वर्षों से भी पुरानी लगती है क्योंकि 1990 में गुरुदेव का महाप्रयाण हो चुका था। 

आज हमारी संजना बेटी वापिस स्कूल जा रही है। उसकी विस्तृत phone talk ने हमारा मन मोह लिया और हम अपने आशीर्वाद के पुष्प बरसाए बिना न रह सके।

इन्ही ओपनिंग रिमार्क्स के साथ निशा और सुनीता बहिन जी की अनुभूतियों का अमृतपान करते हैं।  

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1.सुनीता शर्मा :

वसंत को अब तो 3- 4 दिन ही रह गए हैं और गुरुदेव के आध्यात्मिक जन्मदिन को लेकर मन में एक उत्साह सा हो रहा है। ऐसा लगता है कि वंदनीय माता जी सामने खड़ी मुस्कुरा रही हैं और गुरुदेव भी मुस्करा रहें हो। बहुत ही आनंद सा अनुभव हो रहा है। 

बीते सालों की याद आती है जब हम अपनी मां और कुछ पड़ोसियों के साथ गुरुदेव के दर्शन करने शांतिकुंज पहुंचे थे। इस दिन गुरुदेव का जन्मदिन होता है। मन में तीव्र इच्छा थी कि उनसे मिलेंगे, गुरुदेव को देखने का बड़ी बेसब्री से इन्तजार कर रही थी कि कब सुबह होगी। रात्रि में ठीक से नींद भी न आई। सुबह 2:30 बजे स्नान से निवृत होकर पहली बार हर्बल चाय पी। मन में छटपटाहट सी हो रही थी कि गुरुदेव के दर्शन कब होंगें। गुरुदेव से मिलने के लिए लाइन में खड़े थे , हमारा नंबर आया, हमने गुरुदेव के चरण स्पर्श किए, प्रणाम किया, एक अजीब सी बेचनी सी हो गई कि उन्हें बार-बार देखूं। ऐसा लगा कि मेरी आंखे उन्ही को ढूंढ रही हैं। गुरुदेव के कक्ष के पास ही रसोई थी, मैं वहां बैठकर पूड़ी रोटी बेलने लगी। गुरुदेव कमरे में बैठे थे, उस खिड़की से बार बार गुरुदेव को झांकती और पूरी बेलती चली जा रही थी। गुरुदेव में जो तेज प्रकाश था वह सूर्य चंद्रमा की भांति था। मैं उस दिन को. कभी भूल नहीं सकती। मेरी दशा तो बिल्कुल उस छोटे से नन्हे शिशु की भांति थी जो अपने माता पिता से बिछुड़ जाता है और हर जगह उन्ही को ढूढ़ता रहता है। मैं भी परमपूज्य गुरुदेव और वंदनीय माता जी को ढूंढती रहती हूँ, कभी कभार अनुभव होता भी है कि वह कहीं पास ही हैं और हमें देख रहे हैं। 

मैं गुरुदेव से यहीं प्रार्थना करना चाहती हूं कि मुझे पहले की तरह जल्दी से ठीक कर दें ताकि ऑनलाइन ज्ञानरथ के लेख पढूं और परमपूज्य गुरुदेव हमसे भी कुछ कार्य करवाने का आशीर्वाद दें। बड़ी कठिनता से मन इकट्ठा करके यह छोटी सी अनुभूति लिखी है ,जय गुरुदेव। 

 2. निशा भारद्वाज:

ॐ भूर्भुवः स्वः तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि धियो यो नः प्रचोदयात्।  परम पूज्य गुरुदेव, वंदनीय माता जी और आदिशक्ति जगत जननी माँ गायत्री के चरणों में कोटी-कोटी नमन,ऑनलाइन ज्ञानरथ के सभी सहकर्मियों को सादर प्रणाम।

18 जनवरी 2022 का ज्ञानप्रसाद आरम्भ करने से पूर्व आपने सभी सहकर्मियों को एक पुनीत कार्य करने के लिए आमंत्रित किया था। सभी जानते हैं कि वसंत का पावन पर्व 5 फ़रवरी को है। परम पूज्य गुरुदेव अपना आध्यात्मिक जन्मदिवस वसंत को ही मनाते हैं। गायत्री परिवार की समस्त गतिविधियों का शुभारम्भ वसंत को ही किया जाता रहा है। आपने आमंत्रण दिया है कि परम पूज्य गुरुदेव या ऑनलाइन ज्ञानरथ से सम्बंधित अनुभूतियाँ भेज कर अपने गुरु के चरणों में श्रद्धा सुमन अर्पित करने का परम सौभाग्य प्राप्त करें। उस दिन से लेकर मेरे मन में यही जिज्ञासा थी कि मैं क्या लिखूं , बार बार मन में एक ही प्रश्न उठ रहा था कि क्या लिखूं। 

“बहुत विचार के उपरांत मैं यही लिख रही हूँ कि परम पूज्य गुरुदेव से मैं किस प्रकार जुड़ी।” आदरणीय भाई साहब इसका शत प्रतिशत श्रेय आपको ही जाता है आपके माध्यम से पूज्य गुरुदेव का सूक्ष्म संरक्षण हर पल प्राप्त होता है। ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार से जुड़ने से पहले मैंने केवल गायत्री परिवार का नाम ही सुन रखा था। 

बात क़रीब 2-4 वर्ष पहले की है जब मैंने पहली बार गायत्री परिवार का नाम सुना था। मेरे मायके में एक बुजुर्ग थे, मेरे पिताजी के चाचा जी। यह दिन उनके जीवन का आख़िरी दिन था, वह बहुत बीमार थे। मैं उनका हाल चाल जानने गयी हुई थी। तब उनकी छोटी बहू ने बताया था कि बाबाजी ने गायत्री परिवार की दीक्षा ले रखी थी।अगली सुबह क़रीब पाँच बजे बाबाजी ने अंतिम साँस ले ली। उससे पहले उनकी बहु को सपना आया कि बाबाजी हवन कर रहे हैं और सभी ने पीले वस्त्र पहने हुए हैं। हालाँकि मैं गुरुदेव के बारे में कुछ भी नहीं जानती थी लेकिन मैं यह सब सुनकर बहुत हैरान हुई। मन ही मन गुरुदेव को नमन किया। जब मैं घर आयी तो रोज़ फ़ोन पर गायत्री मंत्र के बारे में सर्च करती रहती थी। जो भी विडीओज़ आती उनको देखती। दोबारा जब मायके गयी तो पता चला कि बाबाजी की दोनों बेटियों ने भी गायत्री मंत्र की दीक्षा ले रखी है। 22 अप्रैल 2019 को मेरे मायके में एक शादी थी, हम सभी इकट्ठे बैठे हुए थे, पूरा कमरा ताया-चाचा की बेटियों और बहनों से भरा हुआ था। किसी ने कहा कि निशु तुम कीर्तन बहुत अच्छा करती हो, इस पर मेरा जवाब बहुत साधारण सा था कि हमारे घर के पास शिवजी का मंदिर है मैं वहां बाक़ी औरतों के साथ भजन कीर्तन में जाती हूँ। उन्होंने मुझसे पूछा कि क्या तुमने दीक्षा ले ली है ? 

“यही वो पल थे जब मेरे सौभाग्य का सूर्योदय हुआ” 

 बिना सोचे समझे मेरे मुँह से एकदम निकल गया कि बुआजी की तरह मैं भी गायत्री मंत्र की दीक्षा लेना चाहती हूँ। शायद यह सब गुरुजी ने स्वयं ही मुझसे कहलवाया था क्योंकि मैंने तो गुरुजी का फ़ोटो तक नहीं देखा था। उस समय से गुरुजी मेरे मन में विराजमान हैं।वो पल मेरे लिए बहुत ही स्पेशल था। उसी शाम बुआ जी ने मुझे गुरुजी और गायत्री परिवार के बारे में बहुत कुछ बताया और आश्वासन दिया कि अपने साथ मुझे भी शांतिकुंज ले चलेंगे लेकिन दुर्भाग्यवश मैं अभी तक नहीं जा पायी हूँ। सपने में उन्ही दिनों गुरुदेव स्वयं एक गाड़ी में आये और मुझे भी शांतिकुंज ले गये और ऐसा लगा कि वापिस घर भी छोड़ गए। तब से लेकर मेरे सपनों में गुरुदेव और माताजी का आना जाना शुरू हो गया। ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार से भी मैं इसी समय एक धीमी रफ़्तार से जुड़ गयी इसमें भी गुरुजी का ही आशीर्वाद था नहीं तो मैं कहां ऑनलाइन ज्ञानरथ से जुड़ सकती थी , मुझे तो कुछ भी पता नहीं था इस प्लेटफॉर्म का। 

सबसे पहले मैंने आपका वो लेख पढ़ा था जिसमें आपने गुरुजी से मिलने के चार स्थान बताए थे और जब गुरुजी की हिमालय यात्रा पर आप लेख लिख रहे थे। तब से मैं ररेग्युलर ऑनलाइन ज्ञानरथ से जुड़ गयी। गुरुजी के बारे में मुझे सबसे ज़्यादा जानकारी आपके लेखों से ही मिली। इसलिए मैं आपको अपना गुरुभाई मानती हूँ। पहले मैं कॉमेंट करने से घबराती थी फिर आहिस्ता आहिस्ता कॉमेंट करने शुरू कर दिए ।आपके पहले रिप्लाई से मुझमें नयी ऊर्जा, नयी उमंग आ गयी और मेरा मनोबल दिन-प्रतिदिन बढ़ने लगा।

4 नवंबर 2020 को करवाचौथ के दिन मेरे मायके देहरा (हिमाचल प्रदेश) गायत्री शक्तिपीठ से मैंने दीक्षा भी ले ली। गायत्री मंदिर के बारे में जानती तो पहले भी थी लेकिन वहां कभी गयी नहीं थी। इसके आगे तो आप मुझे जानते ही हैं। एक बार आदरणीय रेनु श्रीवास्तव जी ने अपने एक कॉमेंट में कहा था कि हम सभी को गुरूगीता का स्वाध्याय भी करना चाहिए। मैंने भी गुरूगीता ऑर्डर कर दी। पिछले दो महीनों से गुरुगीता का अपने पति से चोरी छिपे स्वाध्याय करती रहती हूँ। गुरूगीता ने मेरी सोच ही बदल दी है। 

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हर बार की तरह आज भी कामना करते हैं कि प्रातः आँख खोलते ही सूर्य की पहली किरण आपको ऊर्जा प्रदान करे और आपका आने वाला दिन सुखमय हो। धन्यवाद् जय गुरुदेव

हर बार की तरह आज का लेख भी बड़े ही ध्यानपूर्वक तैयार किया गया है, फिर भी अगर कोई त्रुटि रह गयी हो तो उसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं।

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24 आहुति संकल्प सूची :

9 फ़रवरी 2022 के ज्ञानप्रसाद का अमृतपान करने के उपरांत इस बार आनलाइन ज्ञानरथ परिवार के केवल 3 समर्पित साधकों ने ही 24 आहुतियों का संकल्प पूर्ण कर हम सबका उत्साहवर्धन व मार्गदर्शन कर मनोबल बढ़ाने का परमार्थ परायण कार्य किया है। इस पुनीत कार्य के लिए सभी युगसैनिक बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं और हम कामना करते हैं और परमपूज्य गुरुदेव की कृपा दृष्टि आप और आप सबके परिवार पर सदैव बनी रहे। वह देवतुल्य युगसैनिक  निम्नलिखित हैं :

(1 ) रेनू श्रीवास्तव-29 ,(2 )प्रेरणा कुमारी -27 ,(3 )संध्या कुमार -25

उक्त तीनों सूझवान व समर्पित युगसैनिकों को आनलाइन ज्ञान रथ परिवार की तरफ से बहुत बहुत साधुवाद, हार्दिक शुभकामनाएँ व हार्दिक बधाई हो। रेनू बहिन जी को आज फिर गोल्ड मैडल प्राप्त करने के लिए हमारी व्यक्तिगत एवं परिवार की सामूहिक बधाई। हमारी दृष्टि में सभी सहकर्मी विजेता ही हैं जो अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं,धन्यवाद् जय गुरुदेव

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