क्या अपने रचयिता के बगल में बैठना है मानव की सर्वोच्च उपलब्धि ?

1 फरवरी 2022 का ज्ञान प्रसाद – क्या अपने रचयिता के बगल में बैठना है मानव की सर्वोच्च उपलब्धि ?

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ऑनलाइन ज्ञानरथ के स्तम्भ – शिष्टाचार, आदर, सम्मान, श्रद्धा, समर्पण, सहकारिता, सहानुभूति, सद्भावना, अनुशासन, निष्ठा, विश्वास, आस्था 

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सुप्रसिद्ध वैज्ञानिक निकोला टेस्ला द्वारा 92 वर्ष पूर्व प्रकाशित सम्पादकीय से प्रेरित होकर लिखे गए लेखों की कड़ी का यह दूसरा और अंतिम लेख है। सम्पादकीय से जो प्रेरणा मिली वह तो एक तरफ लेकिन जिज्ञासाओं ने मन मस्तिष्क में इतनी उथल-पुथल मचा दी कि क्या कहा जाए। हमें तो शंका थी कि इतना टेक्निकल लेख, हमारे सरलीकरण के बावजूद ऑनलाइन ज्ञानरथ पर flop ही हो जायेगा, लेकिन जिस श्रद्धा और निष्ठां से आप सब ने इसका अध्ययन किया,उससे हमारा ह्रदय प्रसन्न हो उठा। बहुत बहुत धन्यवाद। आज के लेख से साथ अटैच पोस्टर में आप हमारे उन दस समर्पित सहकर्मियों को देख रहे हैं जिन्होंने अपना अमूल्य समय निकाल कर अनुभूतियाँ प्रस्तुत कीं।सभी का हृदय से धन्यवाद्। आने वाले शनिवार से यह अनुभतियाँ प्रकाशित करने की योजना है।

अगले दो दिन परमपूज्य गुरुदेव की 5 योजनाओं को प्रकाशित करने का प्लान है। 

तो चलते हैं आज के ज्ञानप्रसाद की ओर। 

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मातृत्व के लिए एक श्रद्धांजलि।:

निकोला टेस्ला ने उन माताओं को जिन्होंने God’s best creation को जन्म दिया, श्रद्धांजलि देते हुए लिखा 

1.अगर इस मानवता की प्रतिभा (genius of humanity) के लिए कोई भी श्रद्धांजलि है तो वह है “मातृत्व के लिए एक श्रद्धांजलि।” 

2.Richter ने कहा: ” वह मनुष्य अपनी माँ के लिए अत्यंत दुखी है जिसने उसकी ही माँ की भांति अन्य सभी माताओं को पूजनीय नहीं बनाया।” 

3. एक संस्कारी बेटे Lord Langdale ने कहा: “अगर समस्त विश्व को तराज़ू के एक पलड़े में रखा जाये और मेरी मां को दूसरे में रखा जाता है, तो माँ वाला पलड़ा भरी पड़ेगा।”

यही तराज़ू वाली फोटो उस न्यूज़ आइटम का मुख्य आकर्षण था जिसमें एक पलड़े में एक नवजात शिशु है और दूसरे में विश्व के सभी अजूबे, आविष्कार, रेलमार्ग, गगनचुंबी इमारतें, जहाज, कारखाने इत्यादि हैं, तो शिशु वाला पलड़ा है। ऐसी फोटो होना कोई अतिशयोक्ति नहीं है। 

यही वह फोटो थी जिसने हमारे ह्रदय को छू लिया था और हमें दो full-length लेख लिखने की प्रेरणा दी। लेख तो हमने लिखकर अपने सहयोगियों के समक्ष प्रस्तुत कर ही दिए लेकिन हमारे मस्तिष्क में उस समय की बातों के लेकर जो उथल-पुथल मच गयी उसके समाधान के लिए अभी भी स्वाध्याय जारी है।

क्या उच्च कोटि का वाक्य लिखा था निकोला टेस्ला ने :

विश्व के समस्त अजूबे उस छोटी सी खोपड़ी के अंदर ही तो हैं और भविष्य की समस्त प्रगति जो आने वाले करोड़ों वर्षों में फैलेगी, माताओं की उत्पादक शक्ति में ही तो छिपी हुई है।

“अभी तक यह नहीं दिखाया जा सका है कि आने वाले भविष्य में हम क्या होंगे, कौन-कौन से चमत्कार प्रगट होंगे, जिन्हे माताएं एक के बाद एक अपने बच्चों में पैदा करेंगी और बच्चे अपने चमत्कारी दिमाग से पैदा करेंगे।”

बैलगाड़ी से लेकर उड़ने वाली मशीन तक, canoe से लेकर पनडुब्बी तक, मिसाइल से लेकर ड्रोन तक हर एक वस्तु का अविष्कार “विचार” का उत्पाद ही तो है। अब तो कुछ ही दिनों में फ्लाइंग कार भी देखने को मिलेगी। इस सभी वस्तुओं का उत्पादन मनुष्य के छोटे से मस्तिष्क में उठ रहे विचार ही तो हैं। इन्ही विचारों की दौड़ पर ही तो आधारित है परमपूज्य गुरुदेव का विचार क्रांति अभियान। 

उस परमसत्ता ने जिसे हम कोई भी नाम दे दें, मनुष्य नामक वस्तु (?) को अत्यंत आश्चर्यजनक रूप से बनाया गया है। मनुष्य को इस तथ्य को जान लेना चाहिए और इसकी सराहना करनी चाहिए। यदि संभव हो तो हमें सदैव कुछ बड़ा करने का प्रयास करना चाहिए। यदि बड़ा करना संभव न हो पाए तो उपलब्ध साधन एवं अवसर केअनुसार प्रयास करते रहना चाहिए।

मनुष्य की सर्वोच्च उपलब्धि :

जब कोई बच्चा पैदा होता है तो उसकी इंद्रियों (sense organs) को बाहरी दुनिया के संपर्क में लाया जाता है। ध्वनि, गर्मी और प्रकाश की तरंगें उस नवजात शिशु के कमज़ोर शरीर पर टकराती हैं उसके संवेदनशील तंत्रिका-तंतु (sensitive nerve fibres) कांपते हैं, मांसपेशियां सिकुड़ती हैं और उसी आज्ञा का पालन करते हुए जैसा बताया जाता है वैसे ही सब कुछ करती रहती हैं। इस प्रक्रिया में अकल्पनीय विनम्रता और जटिलता के इस “अद्भुत छोटे से इंजन” का निर्माण हुआ है। विनम्रता इसलिए कि सब कुछ चुपचाप उस दिव्यसत्ता के आदेश अनुसार करता जाता है, जटिलता इसलिए कि इस मशीन की complexity को समझ पाना लगभग नमुमकिन है। हमारी पृथ्वी पर इस तरह के उपकरण की किसी और से तुलना करना असम्भव ही है। वैसे तो इस सारी सृष्टि को ही समझ पाना असम्भव है, लेकिन हम यहाँ केवल मनुष्य की ही बात कर रहे हैं।

मनुष्य नामक यह छोटा सा इंजन श्रम करता है, फलता-फूलता है, बढ़ता है और अधिक से अधिक जटिल कार्य करता है। सृष्टि के साथ चलते-चलते यह इंजन सूक्ष्म प्रभावों के प्रति संवेदनशील होता जाता है और अब पूरी तरह से विकसित होने में खुद को प्रकट करता है। इसी विकास की प्राप्ति पर उसमें एक रहस्यमय, अचूक और अनूठी इच्छा उभरती है – “प्रकृति की नकल करने की इच्छा,उन चमत्कारों पर काम करने की इच्छा,नक़ल करने की इच्छा जिन्हे वह अपने इर्द-गिर्द देखता है /समझता है।” 

इस कार्य से प्रेरित होकर वह अपने जन्म के सितारों को, सुंदरता को, भव्यता को और विस्मय के स्मारकों की खोज और आविष्कार, डिजाइन और निर्माण में लग जाता है। वह अपने अंदर छिपे हुए अमूल्य खज़ाने को सामने लाने के लिए इसकी विशाल कैद ऊर्जाओं को अनलॉक करने के लिए “ब्रह्माण्ड की आंतों” में उतरता है। वह समुद्र की गहरी गहराइयों और आकाश के नील क्षेत्रों पर आक्रमण करता है। वह सब कुछ वश में कर लेना चाहता है और समय और स्थान (Time and space ) को नष्ट कर देना चाहता है। और तो और वह महान सूर्य को ही अपना आज्ञाकारी परिश्रमी दास बनाना आरम्भ कर देता है। वह समझता है कि उसकी शक्ति और पराक्रम से आकाश भी गूँज उठेगा और सारी पृथ्वी उसके बोलने मात्र से कांप उठेगी।इस अजीब प्राणी के लिए भविष्य क्या है, एक सांस से ही तो पैदा हुआ, नाशवान ऊतक ( perishable tissue) फिर भी अमर, शक्तियां भयानक और दिव्य? आखिर वह अंत में करेगा क्या?,उसका टारगेट क्या है और उसकी सर्वोच्च उपलब्धि क्या है? आइये देखें।

बहुत पहले से मनुष्य की धारणा रही है कि जो कुछ भी हमें दिखाई दे रहा है, वह एक प्राथमिक पदार्थ से पैदा हुआ है। यह प्राथमिक पदार्थ एक ऐसा पदार्थ (ईथर) है जो समस्त आकाश में भरा हुआ है और जो जीवन देने वाले प्राण या रचनात्मक शक्ति (Life Force) द्वारा कार्य करता है। इसी पदार्थ से कभी भी न समाप्त होने वाले चक्र ( जीवन- मृत्यु का चक्र?), घटनाओं एवं अन्य वस्तुओं का अस्तित्व है। विलक्षण वेग के अतिसूक्ष्म चक्करों में फेंका गया यह प्राथमिक पदार्थ स्थूल पदार्थ बन जाता है।

अब प्रश्न तो यह उठता है कि क्या मनुष्य की समर्था है कि वह प्रकृति की सभी प्रक्रियाओं में सबसे भव्य, सबसे विस्मयकारी प्रक्रिया को नियंत्रित कर सकता है? क्या वह प्रकृति की अटूट ऊर्जा को अपने सभी कार्यों को करने के लिए उपयोग कर सकता है, और इससे भी बढ़ कर – क्या वह अपने नियंत्रण के साधनों को इतना परिष्कृत कर सकता है कि उन्हें अपनी इच्छा शक्ति से संचालन में लाया जा सके?

“यदि किसी प्रकार वह ऐसा कर पाता तो उसके पास लगभग असीमित और अलौकिक शक्तियां होतीं। उसके आदेश पर, उसकी ओर से थोड़े से प्रयास से ही पुरानी दुनिया गायब हो जाती और नए लोग अस्तित्व में आ जाते ।”

वह अपनी कल्पना के ईथर आकार, अपने सपनों के क्षणभंगुर दर्शन को ठीक कर सकता है, मजबूत कर सकता है और संरक्षित कर सकता है। वह अपने मन की सभी रचनाओं को, किसी भी पैमाने पर, ठोस और अविनाशी रूपों में व्यक्त कर सकता था। वह इस ग्रह (पृथ्वी) के आकार को बदल सकता था, इसके मौसमों को नियंत्रित कर सकता था, इसे ब्रह्मांड की गहराई के माध्यम से किसी भी रास्ते पर ले जा सकता था। वह ग्रहों से टकरा सकता और अपने ही सूर्य, चाँद, तारे बना लेता, अपनी ही गर्मी और प्रकाश उत्पन्न कर सकता था। वह जीवन को सभी अनंत रूपों में उत्पन्न और विकसित कर सकता।

क्या होगी मनुष्य की सर्वोच्च उपलब्धि? :

भौतिक पदार्थ को बनाने और नष्ट करने के लिए, उसे अपनी इच्छा के अनुसार रूपों में एकत्रित करने के लिए, “मनुष्य के दिमाग की शक्ति की सर्वोच्च अभिव्यक्ति” होगी। भौतिक विश्व पर उसकी सबसे पूर्ण विजय, उसकी सर्वोच्च उपलब्धि होगी जो उसे उसके “रचयिता” के बगल में बैठने और अपने अंतिम भाग्य को पूरा करने के लिए सामर्थ्यवान बनाएगी।

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हर बार की तरह आज भी कामना करते हैं कि प्रातः आँख खोलते ही सूर्य की पहली किरण आपको ऊर्जा प्रदान करे और आपका आने वाला दिन सुखमय हो। धन्यवाद् जय गुरुदेव

हर बार की तरह आज का लेख भी बड़े ही ध्यानपूर्वक तैयार किया गया है, फिर भी अगर कोई त्रुटि रह गयी हो तो उसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं।

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24 आहुति संकल्प सूची :

28 जनवरी 2022 के ज्ञानप्रसाद का अमृतपान करने के उपरांत इस बार आनलाइन ज्ञानरथ परिवार के 7 समर्पित साधकों ने ही 24 आहुतियों का संकल्प पूर्ण कर हम सबका उत्साहवर्धन व मार्गदर्शन कर मनोबल बढ़ाने का परमार्थ परायण कार्य किया है। इस पुनीत कार्य के लिए सभी युगसैनिक बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं और हम कामना करते हैं और परमपूज्य गुरुदेव की कृपा दृष्टि आप और आप सबके परिवार पर सदैव बनी रहे। वह देवतुल्य युगसैनिक निम्नलिखित हैं :

(1 ) अरुण वर्मा जी-30,(2 )रेणुका गंजीर जी -24 ,(3 )सरविन्द पाल जी -26,(4 )प्रेरणा बिटिया-24,(5 )सुधा कुमारी जी-24,(6 ) संध्या कुमार जी-26,(7 )रेनू श्रीवास्त्व जी -32  

उक्त सभी सूझवान व समर्पित युगसैनिकों को आनलाइन ज्ञान रथ परिवार की तरफ से बहुत-बहुत साधुवाद, हार्दिक शुभकामनाएँ व हार्दिक बधाई हो जिन्होंने आनलाइन ज्ञान रथ परिवार में 24 आहुति संकल्प पूर्ण कर आनलाइन ज्ञान रथ परिवार में विजय हासिल की है। रेनू श्रीवास्तव जी आज फिर टॉप पर हैं ,हमारी व्यक्तिगत और परिवार की सामूहिक बधाई स्वीकार करें। हमारी दृष्टि में सभी सहकर्मी विजेता ही हैं जो अपना अमूल्य योगदान दे रहे हैं,धन्यवाद् जय गुरुदेव


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