इस ब्रह्माण्ड की अनंत शक्ति एवं मानवीय मस्तिष्क

31 जनवरी 2022 का ज्ञानप्रसाद -इस ब्रह्माण्ड की अनंत शक्ति एवं मानवीय मस्तिष्क

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ऑनलाइन ज्ञानरथ के स्तम्भ – शिष्टाचार, आदर, सम्मान, श्रद्धा, समर्पण, सहकारिता, सहानुभूति, सद्भावना, अनुशासन, निष्ठा, विश्वास, आस्था 

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आने वाले शनिवार को वसंत पर्व है, परमपूज्य गुरुदेव का आध्यात्मिक जन्म दिवस। आशा करते हैं हमारी तरह आप सब भी ऑनलाइन ज्ञानरथ के सहकर्मियों की अनुभूतियाँ को पढ़ने के लिए उत्तेजित  हो रहे होंगें। हमें बहुत ही प्रसन्नता है कि अब तक 10 सहकर्मियों ने अपनी अनिभूतियाँ  भेजी हैं जिनके नाम हैं -साधना सिंह जी ,कमोदिनी गौराहा  जी, मृदुला श्रीवास्तव जी ,रेनू श्रीवास्तव जी, संध्या कुमार जी, सरविन्द पाल जी,प्रेमशीला मिश्रा जी, प्रेरणा बिटिया,निशा भरद्वाज जी एवं पूनम कुमारी जी( संजना बिटिया के मम्मी ) .हम इन  सभी सहकर्मियों का ह्रदय से धन्यवाद करते हैं और निवेदन करते हैं कि शनिवार के बाद वाले 3-4  लेखों को बिल्कुल  मिस न करें। कई बार  ऐसा होता है कि परिजन सोचते हैं कि कल पढ़ लेंगें, इतनी देर में यूट्यूब से लेख गायब हो जाता है। वैसे तो अनुभूतिओं की 2-3 पुस्तकें और कई वीडियो उपलब्ध हैं लेकिन हम चाहते थे कि हमारे अपने परिजन ,अपने भाई,बहिन आगे आएं और गुरुदेव के बारे में बताएं ,हमारा  संकल्प,हमारी योजना को आपने सार्थकता प्रदान की -ह्रदय से नमन करते हैं। 

संध्या बहिन जी ने इन्द्रिय संयम -sensory control- पर एक श्रृंखला लिखी है। आशा करते हैं कि इस श्रृंखला का आरम्भ अनुभतियों के बाद हो पायेगा। 

निकोला टेस्ला पर आधारित दो खण्डों का एक अद्भुत लेख जिसका  पहला आज  खंड प्रस्तुत कर रहे हैं बहुत ही रोचक है। अमरीकन इंग्लिश में प्रकाशित हुए इस लेख का सरल हिंदी में अनुवाद करके, जगह जगह इंग्लिश के शब्द प्रयोग करके, इसको सरल बनाने का प्रयास किया है।  पूर्ण विश्वास है कि हमारे सहकर्मी गुरुदेव द्वारा दिया गया विचार क्रांति सूत्र इस लेख के साथ जोड़ने का प्रयास करेंगें।

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25 जनवरी के ज्ञानप्रसाद में हमने अपने सहकर्मियों के साथ दो महान  विभूतियों का चर्चा की थी।  एक थे John D Rockefeller और दूसरे  थे  Nikola Tesla, जब हम इस लेख पर कार्य कर रहे थे तो हमारे हाथ एक 92 वर्ष पुराना सम्पादकीय लगा जिसको हमने अपने  पास सेव करके  रख लिया कि समय आने पर अपने सहकर्मियों के समक्ष लायेंगें। इंग्लिश भाषा में प्रकाशित हुआ यह सम्पादकीय Texas USA  के Sunday Light समाचार पत्र में विश्विख्यात अविष्कारक  निकोला टेस्ला  द्वारा प्रकाशित किया गया था। विज्ञान की कठिन  भाषा के बावजूद यह सम्पादकीय बहुत ही रोचक है, इसमें  मानव की  अनंत क्षमताओं के बारे में बहुत ही उच्स्तरीय विचार हैं  और  प्राण ऊर्जा, ब्रह्माण्ड इत्यादि शब्दों का भी वर्णन है।1897 में भारत लौटकर स्वामी विवेकानंद के लेक्चर्स में भी टेस्ला का ज़िक्र मिलता है।  एक जगह वो कहते हैं :

“वर्तमान के कुछ सबसे बुद्धिमान वैज्ञानिकों ने वेदांत के विज्ञान सम्मत होने को स्वीकार किया है। इनमें से एक को मैं निजी तौर पर जानता हूं।  यह व्यक्ति दिन रात अपनी लैब में ही लगा रहता है  इसके पास खाने का वक्त भी नहीं है।  लेकिन मेरे द्वारा दिए गए वेदांत के लेक्चर को अटेंड करने के लिए वो घंटों खड़ा रह सकता है।  उसके अनुसार ये लेक्चर  इतने विज्ञान सम्मत हैं कि विज्ञान आज जिन निष्कर्षों पर पहुंच रहा है ये उनसे पूरी तरह मेल खाते हैं। 

जिस सम्पादकीय की हम बात कर रहे हैं उसमें एक तराज़ू का  चित्र दर्शाया गया है जिसमें तराज़ू के एक पलड़े में  किसी नवजात शिशु  को रखा है और दूसरे में विश्व के सभी अजूबे,  आविष्कार, रेलमार्ग, गगनचुंबी इमारतें, जहाज, कारखाने इत्यादि हैं। दिखाया गया है कि  शिशु वाला पलड़ा  है। ऐसा चित्र   होना कोई अतिशयोक्ति नहीं है। विश्व  के समस्त  अजूबे उस छोटी सी  खोपड़ी के अंदर ही तो  हैं और भविष्य की समस्त प्रगति जो करोड़ों वर्षों में फैलेगी, माताओं की उत्पादक शक्ति में ही तो छिपी हुई है। नवजात शिशु के मस्तिष्क में बंद शक्ति और संभावनाओं की तुलना में दूसरे पलड़े में दिखाई गयी सब वस्तुएं कुछ भी नहीं हैं। केवल कल्पना के आधार पर ही नहीं, बल्कि पूरी तरह से वैज्ञानिक प्रशिक्षण और ‘वैज्ञानिक’ प्रतिभा के आधार पर हम सब  उनके विचारों और अटकलों से प्रसन्न होंगे। जब मिस्टर टेस्ला ने सुझाव दिया कि आने वाले लाखों वर्षों में मनुष्य इस ग्रह के size और shape  को बदल सकता है और अंतरिक्ष के माध्यम से अपनी दिशा खुद चुन सकता है, तो वह हल्के में नहीं बोलते हैं । श्री टेस्ला, अपने युग के वास्तविक वैज्ञानिकों और आविष्कारकों में से एक हैं। आज से 92 वर्ष पूर्व  26वीं स्ट्रीट और फिफ्थ एवेन्यू  न्यूयॉर्क में डेलमोनिको के पुराने रेस्तरां में बैठे, उन्होंने अपने हाथ में  वाइन का एक छोटा गिलास उठाते हुए  कहा: 

“वह शक्ति जो उस गिलास में अणुओं और परमाणुओं को एक साथ जोड़े  रखती है, अगर इसे release  किया जा सके, तो वह शक्ति USA  में सबसे बड़े कारखाने की मशीनरी चलाने में सक्षम है।”  

1930 में यह बात मात्र एक  कल्पना प्रतीत हो रही थी लेकिन अब यह बात  स्कूल में सातवीं -आठवीं  कक्षाओं  में  बच्चों को पढाई जाती  है। हर कोई जानता है कि परमाणु के भीतर electrons होते हैं और उन्हें बांधे रखने वाली शक्ति ( Binding Force) हमारी कल्पना से परे है। Electrons एक सेकंड में खरबों बार nucleus के इर्द- गिर्द चक्र लगा  रहे होते हैं।  हालांकि, अधिकांश लोगों के लिए, यह “निराकार  विज्ञान” समझना कठिन  है, और  रूढ़िवादी अटकलें भी हैं कि क्या  ऐसा हो  सकता है ?  लेकिन यह महसूस करने के लिए किसी वैज्ञानिक प्रशिक्षण की आवश्यकता नहीं है कि एक छोटा सा, कुछ घंटों का  बच्चा, जो अठखेलियां ले  रहा है इस ग्रह  की सबसे महत्वपूर्ण चीज़  है।  इस तथ्य को certify करने के लिए  न ही “परमाणु के अंदर झॉँकनें,” या दूरस्थ  ब्रह्मांडों को तोलने की आवश्यकता है। इस नन्हे से चेहरे को ध्यान  से देखें तो मनुष्य द्वारा प्राप्त की गयीं संभावनाओं का मूल्यांकन अत्यंत ही गर्व का विषय है।   

i) 250 वर्ष पूर्व Richard  Arkwright  जिन्होंने spinning machine का अविष्कार किया था, वह    भी तो कभी नवजात शिशु थे। क्या हम में से किसी ने कल्पना की थी कि इस बच्चे के दिमाग में क्या -क्या संभावनाएं पनप  रही हैं ? 

ii) बादलों से ली गई विश्व भर की रौशनी   एक छोटे से बल्ब में बंद करने वाले Thomas Alva Edison नामक  एक बच्चे के दिमाग की कलाकृति थी।बादलों से बिजली लेने का अर्थ है कि  आकाश में कड़कने वाली बिजली से एडिसन को प्रेरणा मिली थी।  एडिसन Port Huron  से Detroit तक  रेलगाड़ी में कैंडी, सब्ज़ियां और फल बेचा करते थे। उनकी  आविष्कारित  Qudriplex telegraphy की  उस समय 10000 डॉलर बोली लगी थी जिसकी कीमत आज के समय में लाखों डॉलर है।  

iii)  एक लकड़ी के केबिन में गदंगी भरे फर्श और खिड़कियों के बिना पैदा हुए  एक छोटे से नीली आंखों वाले बच्चे  अब्राहम लिंकन को USA  में slavery  समाप्त करने की शक्ति  उनकी मां नैन्सी हैंक्स ने दी थी। जिस दिन अब्राहम लिंकन ने पहली बार अपनी नन्ही नीली आँखें खोलकर चारों ओर देखा, उस दिन उनके पास वह शक्ति थी। हर माँ को आशा और गर्व के साथ याद रखना चाहिए कि उसके घुटने पर क्रीड़ा कर रहे ,झूल रहे  बच्चे और उसके आसपास के छोटे बच्चों की संभावनाओं की कोई सीमा नहीं है। Every child’s  potential is really limitless- the only need is to explore that potential – हर किसी बच्चे में अनंत प्रतिभा का छुपा हुआ कोष है ,आवश्यकता है उस प्रतिभा के विकास की और सही समय की ,सही अवसर की।   

इन बच्चों में  भविष्य की आशा छिपी  है :

लाखों माताएँ, जिनमें से कुछ इस सम्पादकीय में  टेस्ला द्वारा कही गई सभी बातों को समझ नहीं पाएंगी, एक बात जान लें, प्रेम दुनिया की सबसे बड़ी शक्ति है और  उससे भी बड़ी बात है कि “सांसारिक प्राणियों में सबसे उत्तम और  महत्वपूर्ण प्रेम  एक माँ का अपने असहाय बच्चे के लिए प्रेम है, उस बच्चे के लिए जो न बोल सकता है ,न चल सकता है ,न सुन सकता है।विश्व  की अनगनित माताओं को अपने बच्चों में असीम संभावनाएँ, असीम आशाएँ दिखाई देती हैं। हर नवजात शिशु  अपनी मां के लिए एक जीनियस होता है। और हम सब जानते हैं  “छोटे बच्चों के होठों और दिलों में, माँ नामक  भगवान का वास होता है।”

यह तस्वीर, “मनुष्य के मन” के लिए सराहनीय रूप से व्यक्त की गयी एक  श्रद्धांजलि है जो  मानव मस्तिष्क की शक्ति पर बल देती है।  वह मानव मस्तिष्क जो अणुओं और परमाणुओं का एक संग्रह है। लेकिन जितना विज्ञान किसी औसत इंसान को दिखता  है, उससे कहीं अधिक दिलचस्प है एक बच्चे के मस्तिष्क में बंद ऊर्जा और और उस ऊर्जा की उपलब्धि।  यह तथ्य है कि बच्चा “मानवीय स्नेह” का एक उत्पाद है, इसकी सफलता मां के प्यार को दर्शाती है। वह “मातृ प्रेम” अन्य सभी शक्तियों की शक्ति है, वह शक्ति जो मानव जाति को विकास की दिशा में  ले जाती है। यही स्नेह और प्रेम की शक्ति है जो मानव को  अंधकार और  क्रूरता से दूर, वास्तविक सभ्यता ओर आशा की किरण की ओर अग्रसर करती है।  मां के गुण बच्चे में उसकी सफलता और उपयोगिता में परिलक्षित होते हैं। बच्चा वही करता है जो  मां  करती है, उसकी नकल करता है।

To be continued 

हर बार की तरह आज भी कामना करते हैं कि प्रातः आँख खोलते ही सूर्य की पहली किरण आपको ऊर्जा प्रदान करे और आपका आने वाला दिन सुखमय हो। धन्यवाद् जय गुरुदेव

हर बार की तरह आज का लेख भी बड़े ही ध्यानपूर्वक तैयार किया गया है, फिर भी अगर कोई त्रुटि रह गयी हो तो उसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं।

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24 आहुति संकल्प सूची :

28 जनवरी 2022 के ज्ञानप्रसाद का अमृतपान करने के उपरांत इस  बार  आनलाइन ज्ञानरथ परिवार के 6  समर्पित साधकों ने  ही 24 आहुतियों का संकल्प पूर्ण कर हम सबका उत्साहवर्धन व मार्गदर्शन कर मनोबल बढ़ाने का परमार्थ परायण कार्य किया है। इस पुनीत कार्य के लिए सभी युगसैनिक बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं और हम कामना करते हैं और परमपूज्य गुरुदेव की कृपा दृष्टि आप और आप सबके परिवार पर सदैव बनी रहे। वह देवतुल्य युगसैनिक निम्नलिखित हैं :

(1 ) संजना कुमारी बिटिया  -24 (2 ) संध्या कुमार जी -28 ,(3)सरविन्द कुमार जी-40 ,(4) रेनू श्रीवास्तव जी-26 ,(5) प्रेरणा कुमारी बिटिया-25,(6 ) अरुण कुमार वर्मा जी -30   

उक्त सभी सूझवान व समर्पित युगसैनिकों को आनलाइन ज्ञान रथ परिवार की तरफ से बहुत-बहुत साधुवाद, हार्दिक शुभकामनाएँ व हार्दिक बधाई हो जिन्होंने आनलाइन ज्ञान रथ परिवार में 24 आहुति संकल्प पूर्ण कर आनलाइन ज्ञान रथ परिवार में विजय हासिल की है। आदरणीय सरविन्द पाल  जी आज फिर टॉप पर हैं ,हमारी व्यक्तिगत और परिवार की सामूहिक बधाई स्वीकार करें।  हमारी दृष्टि में सभी सहकर्मी  विजेता ही हैं जो अपना अमूल्य योगदान  दे रहे हैं,धन्यवाद् जय गुरुदेव


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