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अपने आत्मीयजनों से चर्चा 

21 जनवरी 2022 का ज्ञानप्रसाद – अपने आत्मीयजनों से चर्चा 

आज ज्ञानप्रसाद के लेख को स्थगित करके इच्छा हुई कि अपने आत्मीयजनों से सूक्ष्म तरंगों से जुड़ने का प्रयास किया जाये। कुछ एक आत्मीयजनों  को छोड़ कर जिनके साथ हमारे फ़ोन से सम्बन्ध हैं, अधिकतर को हमने देखा तक नहीं है।  जब कमेंट देखते हैं तो ह्रदय पटल पर एक काल्पनिक सी छवि बना लेते हैं।  कई बार तो यह काल्पनिक  छवि असल छवि से बिल्कुल  मेल नहीं खाती और हमारे पास  ठहाके लगा कर अपने साथ विनोद करने के इलावा कोई मार्ग नहीं दिखता। साधना बहिन जी ने ज़ूम मीटिंग करने का सुझाव दिया था लेकिन उसका कोई खास रिस्पांस न मिलने के कारण बंद कर दिया था।     

लगभग तीन सप्ताह  उपरांत हम अपने परिवार के सदस्यों के समक्ष “अपनों से अपनी बात” कहने आये हैं।  इससे पूर्व 28 दिसंबर को विचारों का कुछ आदान प्रदान संभव हो पाया था। आज की बात आरम्भ करने से पूर्व हम अपने सभी सहकर्मियों का ह्रदय से धन्यवाद् करना चाहेंगें जो अपना अमूल्य समय निकाल कर ,अपनी पारिवारिक ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए ,कोरोना जैसी महामारी के साथ जूझते हुए, युवा साथी-बच्चे अपनी विद्यार्थी जीवन की  ज़िम्मेदारियाँ निभाते हुए अनवरत, regularly ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार  के साथ  न केवल जुड़े हुए हैं बल्कि औरों को भी इस परिवार में लाने का कठिन पुरषार्थ कर रहे हैं। सभी सहकर्मियों  का अंतरात्मा की गहराईयों से धन्यवाद् ,आभार। 

हमारे सहयोगी बहुत ही कठिन परीक्षा से गुज़र रहे हैं :

“कठिन” हमने इस कारण लिखा है कि यह कार्य सच में बहुत ही कठिन है। कठिन इसलिए कि लोगों की धारणा में परिवर्तन लाना अत्यंत कठिन,लगभग असंभव सा कार्य है। क्योंकि जिनके पास हम जाते हैं, परमपूज्य गुरुदेव के बारे में बताने का प्रयास करते हैं,अपने मिशन की,अपने परिवार  की अच्छी बातें बताने का प्रयास करते हैं, वह हमारी बातों पर विश्वास क्यों करेंगें, क्योंकि इस भौतिकवादी संसार में प्रत्यक्षवाद का बहुत ही  बोलबाला है। हर कोई चमत्कार देखना चाहता है।  गायत्री उपासना से instant परिणाम प्राप्त करना चाहता है। आप खुद सोचिये क्या यह संभव हो सकता है -कदापि नहीं। परमपूज्य गुरुदेव ने खुद चमत्कारों के खिलाफ आवाज़ उठाई। गायत्री मन्त्र में  ब्रह्मास्त्र जितनी शक्ति अवश्य है, nuclear missile जितनी क्षमता अवश्य है, द्वितीय विश्व युद्ध में  हिरोशिमा-नागासाकी जापान पर फेंके गए nuclear weapon जितनी शक्ति अवश्य है लेकिन उसके लिए महर्षि विश्वामित्र जैसी साधना की भी आवश्यकता है। इस विषय पर भी हमने एक लेख save करके रखा हुआ है, समय आने पर आपके समक्ष प्रस्तुत करेंगें। हमारे पास आये दिन इस तरह के परिजनों के फ़ोन  आते रहते हैं जो चमत्कारों की तलाश में हैं ,उन्हें केवल चमत्कार चाहिए, पात्रता विकसित करने की बात कहते हैं  तो भाग खड़े होते हैं। 

हमारी बात लोग तभी सुनेगें, हमसे convince तभी होंगें जब  हमारा उनके साथ आत्मा का सम्बन्ध स्थापित होगा। और आत्मा का सम्बन्ध स्थापित करने के लिए प्रेम की भावना का सहारा लेना पड़ता है जो आज के युग में प्रायः लुप्त ही होता जा रहा है। छोटा बच्चा अपनी माँ का पल्लू पकड़ कर पीछे- पीछे क्यों भागा-फिरता है, इसलिए कि माँ के साथ उसका आत्मिक सम्बन्ध है, उसे माँ के संरक्षण में जो मिलता है वह कहीं औरपाना अत्यंत दुर्लभ है,असंभव है । हम अपने गुरु को, गुरु की शिक्षा को, गुरु की अमृतवाणी को unique बना दें तो कोई कारण नहीं कि लोग हमारी बात न सुनें। आप सब हमारी बात सुन रहे हैं, प्रतिदिन सुन रहे हैं, परमपूज्य गुरुदेव के मार्गदर्शन में लिखा एक- एक लेख आपकी अंतरात्मा की गहराईयों तक अवतरित हो रहा है तो कोई कारण नहीं कि आप द्वारा अन्य  लोग प्रेरित नहीं होंगें। ऐसा हमें अटल विश्वास है। शांतिकुंज गायत्री परिवार से आजकल तो ऑनलाइन वीडियोस प्रसारित हो रही हैं,यूट्यूब चैनल भी है।  कभी वोह दिन भी थे जब निर्माण हो रहे शांतिकुंज के प्रांगण में टेंटों में उद्बोधन हुआ करते थे। एक एक वक्ता  बैटरी चार्ज करने की बात करता था, जब हमने पहली बार यह उद्बोधन सुने तो सच में बैटरी चार्ज होने जैसा ही था।    

जो परिजन हमारे साथ जुड़े हुए हैं, वह केवल इसी कारण जुड़े हुए हैं कि उनमें प्रेम की भावना है, समर्पण की भावना है, दान की प्रवृति है, कुछ देने की प्रवृति है। चाहे वह समय है (समयदान), चाहे वह श्रम है (श्रमदान), विवेक है,योग्यता है (विवेकदान), रूपया- पैसा है(अंश दान),ज्ञान है( ज्ञानदान) ! जब हम अंश दान की बात कर रहे हैं तो आप सोचते होंगें कि  हमने तो ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार में  कभी कोई पैसा नहीं दिया, सब कुछ  ऑनलाइन है, सब कुछ फ्री है।  लेकिन ऐसा नहीं है, आपने फ़ोन खरीदा हुआ है ,इंटरनेट के पैसे  देते हैं और इस investment का गुरुकार्य में प्रयोग कर रहे हैं, गुरु के विचारों के प्रचार-प्रसार में प्रयोग कर रहे हैं। अवश्य ही फ़ोन को अन्य  कार्यों में  भी प्रयोग करते है लेकिन maximum तो गुरुकार्य के लिए ही  प्रयोग करते हैं। इसी  गणित पर आधारित एक और तर्क दिया जा सकता है। TIME IS MONEY बहुत ही commonly और fashionably प्रयोग किया जाता है।  तो जब आप समयदान कर रहे हैं तो अंशदान भी तो हो रहा है।        

कल वाले लेख पर आधारित कमैंट्स में  अधिकतर परिजनों ने  प्रेम, विश्वास, श्रद्धा, निष्ठा,आत्म परिष्कार ,आत्मा,परमात्मा,पात्रता शब्दों का प्रयोग किया गया है जिससे विदित हो रहा है कि हमारे सहकर्मियों में गुरुकार्य में योगदान की भावना बहुत ही प्रबल होती दिख रही है। साधना बहिन ,निशा भरद्वाज जी और निशा दक्षित जी ने अपने ह्रदय पटल पर  उठ रही टीस को व्यक्त करते हुए गुरुदेव के सपनों को साकार करने में प्रयास भी करना चाहा है। साधना बहिन जी ने परमपूज्य गुरुदेव को  मार्गदर्शक और हमें पथ प्रदर्शक कहा है। गुरुदेव तो अवश्य ही मार्गदर्शक हैं लेकिन हम पथ प्रदर्शक हैं कि नहीं, इस पर तो प्रश्न चिन्न है ,हाँ सहायता के लिए हम सदैव ही तत्पर हैं। हम सभी का सामूहिक प्रयास ही इसमें कार्यरत होता आया है और आगे भी आता रहेगा। 

एक निवेदन :

5  फरवरी 2022 को वसंत पर्व है ,परमपूज्य गुरुदेव का आध्यात्मिक जन्म दिवस। एक बार फिर से याद दिला रहे हैं कि आपके पास जो भी कोई अनुभूति हो हमारे साथ शेयर करें ताकि हम 5 फरवरी का ज्ञानप्रसाद अनुभूतियों के रूप में ही गुरु चरणों में अर्पित कर सकें। हमें विश्वास है कि हमारे वरिष्ठ सहकर्मियों के पास अवश्य ही कुछ अनमोल खज़ाना होगा। आप ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के बारे में भी लिख सकते हैं। जल्दी कीजिये दिन बहुत ही कम बचे हैं। 

ज्ञानप्रसाद लेखों की अगली श्रृंखला हम सोमवार 24 जनवरी से ही आरम्भ करेंगें। और कल शनिवार को एक वीडियो आपके समक्ष प्रस्तुत करेंगें।  हो सकता है हमारे परिजनों ने यह वीडियो देखी  हो लेकिन ऑनलाइन ज्ञानरथ में शामिल करना अति आवश्यक है।  आपसे निवेदन है कि इस वीडियो की description अवश्य पढ़ें और अधिक से अधिक  कमेंट के श्रद्धा सुमन गुरुचरणों में अर्पित करें।    

इन्ही शब्दों के साथ हम अपनी लेखनी को विराम देते हैं और किसी भी त्रुटि के लिए करबद्ध क्षमा प्रार्थी हैं। 

हर बार की तरह आज भी कामना करते हैं कि प्रातः आँख खोलते ही सूर्य की पहली किरण आपको ऊर्जा प्रदान करे और आपका आने वाला दिन सुखमय हो। धन्यवाद् जय गुरुदेव

हर बार की तरह आज का लेख भी बड़े ही ध्यानपूर्वक तैयार किया गया है, फिर भी अगर कोई त्रुटि रह गयी हो तो उसके लिए हम क्षमाप्रार्थी हैं।

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24 आहुति संकल्प सूची :

20  जनवरी 2022 के ज्ञानप्रसाद का अमृतपान करने के उपरांत इस  बार  आनलाइन ज्ञानरथ परिवार के  9  समर्पित साधकों ने 24 आहुतियों का संकल्प पूर्ण कर हम सबका उत्साहवर्धन व मार्गदर्शन कर मनोबल बढ़ाने का परमार्थ परायण कार्य किया है। इस पुनीत कार्य के लिए सभी युगसैनिक बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं और हम कामना करते हैं और परमपूज्य गुरुदेव की कृपा दृष्टि आप और आप सबके परिवार पर सदैव बनी रहे। वह देवतुल्य सप्तऋषि  निम्नलिखित हैं :

(1) अरूण कुमार वर्मा जी – 34. (2) रेनू श्रीवास्तव बहन जी – 31, (3) डा.अरुन त्रिखा जी – 27, (4) रजत कुमार जी – 27, (5) पिंकी पाल बिटिया रानी – 27, (6) प्रेरणा कुमारी बिटिया रानी – 26, (7) संध्या बहन जी – 26, (8) नीरा त्रिखा बहन जी – 24. (9) सरविन्द कुमार पाल – 24, 24

उक्त सभी सूझवान व समर्पित युगसैनिकों को आनलाइन ज्ञान रथ परिवार की तरफ से बहुत बहुत साधुवाद व हार्दिक शुभकामनाएँ व हार्दिक बधाई हो जिन्होंने आनलाइन ज्ञान रथ परिवार में 24 आहुति संकल्प पूर्ण कर आनलाइन ज्ञान रथ परिवार में विजय हासिल की है। इस युगसेना के Commander-in- Chief अरुण कुमार वर्मा  जी को एक  बार फिर 34   अंक  प्राप्त कर  स्वर्ण पदक जीतने  पर  हमारी  व्यक्तिगत और परिवार की सामूहिक बधाई। जय गुरुदेव

हमारी दृष्टि में सभी सहकर्मी  विजेता ही हैं जो अपना अमूल्य योगदान  दे रहे हैं,धन्यवाद् जय गुरुदेव   


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