Life can be difficult with bad health. Learn how to stay healthy today

आग ईंधन  से नहीं, पानी डालने से बुझेगी।

3 जनवरी 2022 का ज्ञानप्रसाद -आग ईंधन  से नहीं, पानी डालने से बुझेगी।

हीरक जयंती शीर्षक पर  पांच ज्ञानप्रसाद और सूक्ष्मीकरण साधना पर तीन वीडियोस के ज्ञानप्रसाद का अमृतपान करके हमारे सहकर्मियों की अंतरात्मा इस कोरोना काल में अवश्य ही तृप्त हुई होगी। यूट्यूब की कुछ समस्या भी आती रही, कमैंट्स एवं और साधनों से संपर्क भी बनता रहा,अपने विवेक के अनुसार रिप्लाई भी करते रहे। रेणुका श्रीवास्तव बहिन जी ने जीमेल पर अपना फ़ोन नंबर और कमेंट दोनों भेजे, हमने आपके साथ शेयर  भी किये। उन्हें हमने व्हाट्सप्प ग्रुप में भी ऐड कर लिया है। ऐसा है हमारे सहकर्मियों का समर्पण। समर्पण की तो बात ही क्या कहें विदुषी बहिन जी अपनी 92 वर्षीय  माता जी की केयर करते ज्ञानरथ में भी सहयोग दे रही हैं। संजना बेटी को 3-4 दिन की छुट्टी मिली उसने भी अपना योगदान देकर परमपूज्य गुरुदेव का आशीर्वाद प्राप्त किया। फ़ोन पर भी बात हुई, ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के अपनत्व को मिस करती हुई दिखाई दी। मनीषा सिंह बेटी भी बड़े दिनों बाद सक्रिय दिखी,उसके शीर्ष पर भी गुरुदेव का हाथ आशीर्वाद देता दिखा।  प्रेरणा बिटिया से फ़ोन पर बात हुई, परमपूज्य गुरुदेव ने उसे एक  और ज़िम्मेदारी प्रदान की है, आपके साथ  शीघ्र ही  यह पुरषार्थ भी शेयर करेंगें। हमारा हृदय  हर समय अपने  सहयोगियों के मध्य ही रहता है। परमपूज्य गुरुदेव से आशीर्वाद के लिए  निवेदन करते हैं कि प्रत्येक घर में सुख शांति का वातावरण बना रहे। 

आइये आगे बढ़ें और परमपूज्य गुरुदेव की  युगनिर्माण योजना का हिस्सा बनने  का सौभाग्य प्राप्त करें beacuse we are among the very few persons  chosen by Parampujy Gurudev after  a rigorous selection process .

सूक्ष्मीकरण साधना का विषय इतना विशाल है कि इसको समझना और कुछ एक पन्नों में सिकोड़ना अत्यंत कठिन /असम्भव हैं। उसी रोडमैप पर चलते हुए आज से कुछ लेख ऐसे आरम्भ  करने का विचार है जिससे गुरुदेव की  हमारे प्रति आशाएं और उनके द्वारा निर्धारित दिशानिर्देशों पर प्रकाश डालने का प्रयास किया जायेगा । इन लेखों में हम देखेंगें कि गुरुदेव की दृष्टि कितनी विश्व्यापी है, उन्हें समस्त विश्व की चिंता है, ऐसे ही उनकी आँखों में आंसू नहीं आ जाते थे, ऐसे  ही उनकी वाणी में सिसकियाँ नहीं उभर आती थीं -हम सभी ने उनकी  तीन वीडियोस में देखा है।  वीडियो तो पिछले 10 वर्ष से उपलब्ध थी लेकिन कितनों ने इतनी श्रद्धा से परमपूज्य गुरुदेव को अपने ह्रदय में स्थान दिया, ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार इसका साक्षी है। वर्तमान में जो  कुछ भी हम भयावह स्थिति अपने आगे -पीछे, ऊपर नीचे ,वातावरण में, शॉपिंग मॉल्स में इत्यादि हम देख रहे हैं गुरुदेव ने 30- 40 वर्ष पूर्व ही देख लिया था और इसके निवारण के लिए ही इतनी  कठिन साधना  में अपनेआप को तपाया -नमन ,नमन एवं नमन। 

तो आइये देखें गुरुदेव 1986 में क्या कह रहे हैं –            

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इस वर्ष का महत्वपूर्ण कार्यक्रम एक लाख यज्ञ एवं सामूहिक मंत्रोच्चारण: 

युगसन्धि की गतिविधियां अब क्रमशः तीव्र  से तीव्रतम होती जा रही है। संसार बिखरा हुआ है इसलिए जो दुर्घटनाएं, षड्यंत्र  घटित हो रही हैं  उनका छितराया हुआ स्वरूप वैसा दृष्टिगोचर नहीं होता जैसा कि यह सब एकत्रित होने पर दीख पड़ता है। फिर भी विश्व में जो कुछ इन दिनों घटित हो रहा है,निकट भविष्य में जो घटित होने जा रहा है, वह भयावह है। उसे एकत्रित करके देखा जाय तो प्रतीत होगा कि सृजन से पहले  होने वाला ध्वंस क्रमशः आगे ही बढ़ रहा है पीछे नहीं हट रहा। 

इसके पीछे अदृश्य वातावरण, प्रकृति का प्रकोप और मनुष्य समुदाय का बिगाड़ा हुआ  अन्तःकरण है। कारण गहरे भी हैं और विषम भी। इसलिए हमें  स्थिति की गम्भीरता  समझनी चाहिए और विनाश के प्रतिरोध में जो करना चाहिए, वह करना चाहिए।

प्रस्तुत अभाव  का निराकरण कैसे हो? इसके उत्तर में एक ही उपाय हाथ रहता है कि दुर्भावनाओं का समाधान कर सकने में समर्थ “अध्यात्म उपचारों” (spiritual remedies)  का आश्रय लिया जाय। आग ईंधन  से नहीं, पानी डालने से बुझेगी।

भौतिक समस्याओं का भौतिक प्रयत्नों से समाधान होता है। लाठी का लाठी से, घुसे का घुसे से, धन का धन से, बल का बल से जवाब दिया जा सकता है। किन्तु आज की समस्या सूक्ष्म जगत तक जा पहुंची है। उसका निराकरण अन्तःकरण की गहराई में सन्निहित शक्ति के सहारे ही सम्भव है। वृत्रासुर की शक्ति से जब देवता भी न जीत सके तो ऋषि की अस्थियों से बना वज्र उस संकट को टालने में समर्थ हो सका। इन दिनों भी कुछ एक की महती साधना तपश्चर्या चल रही है। पर इस बार उतना ही पर्याप्त न होगा। इन दिनों तो सामूहिक संकल्प शक्ति से महिषासुर वध की कथा ही पुनरावृत्ति के रूप में दुहरानी पड़ेगी।

प्रज्ञा परिवार एक समूचा देव परिवार है। उसमें जन्मान्तरों के संचित संस्कारों वाली आत्माएं ही प्रयत्नपूर्वक एकत्रित की गई हैं। आवश्यकता सभी के समन्वित प्रयत्न की है। अब तक जप और पाठ का ही क्रम चला है अब इसमें यज्ञ प्रक्रिया भी सम्मिलित करनी होगी। सम्भव हो तो हर रविवार या पूर्णिमा को सामूहिक यज्ञ का क्रम चलायें। जन्मदिनों के अवसर पर एक कुण्डी यज्ञ होता रहे तो भी इतने बड़े समुदाय के जन्म दिनों की संख्या एक लाख होती है। इतने तो अपने वरिष्ठ प्रज्ञापुत्र ही हैं। उन सबका जन्मदिन मनाने से एक वर्ष में एक लाख यज्ञ हो जाते हैं। इसमें सामूहिक मंत्रोच्चार से उत्पन्न “प्राण ऊर्जा” का समावेश होगा। अतएव उसकी शक्ति और भी अधिक बढ़ जायेगी। कुण्डों की और आहुतियों की संख्या से ही यज्ञ शक्ति की गरिमा नहीं बढ़ती वरन् सुपात्र मन्त्रोच्चारणकर्ताओं की कितनी प्राण-शक्ति सम्मिलित हुई, यह भी देखा जायेगा। चूंकि हर जन्मदिन में बड़ी उपस्थिति होती है और सभी मन्त्रोच्चारण करते हैं अतएव इन यज्ञों में वेदी एक ही होने और आहुतियों की संख्या सीमित रहने पर भी मन्त्रोच्चारण अधिक होने से स्वभावतः उसकी शक्ति बढ़ जायेगी। वातावरण संशोधन हेतु इस संचित  शक्ति की ही आवश्यकता है।

आजकल हमारे स्वयं के प्रवचन और मन्त्रोच्चारण नहीं होते, पर टेप रिकार्डर के माध्यम से हम अपने मनोभावों को दूसरों तक पहुँचाने की प्रक्रिया अपनाते हैं। बैखरी वाणी की सीमा इतनी ही है। मध्यमा, परा, पश्यन्ति वाणियों को प्रयोग इन दिनों भी होता है पर वह होगा टेप रिकार्डर के माध्यम से। 24 गायत्री मन्त्रों का हमारी वाणी में एक लयबद्ध टेप रिकार्ड हुआ है। यह परा,पश्यंति वाणी का है। जिन यज्ञों में हमारी वाणी भी सम्मिलित करनी हो वे इस टेप उच्चारण के साथ अपना उच्चारण भी मिला दें। इस प्रकार उसकी शक्ति और भी कई गुनी बढ़ जायगी। इस वर्ष 1 लाख यज्ञ होने और उसमें 24 लाख से भी कई गुने अधिक हमारे उच्चारण सम्मिलित रहने का आयोजन है। जिन्हें आवश्यकता हो वे हमारे द्वारा उच्चारण किये टेपों को भी मँगा सकते हैं। वैसे बिना यज्ञ के भी हमारे उच्चारण में अपना उच्चारण मिलाकर दैनिक या साप्ताहिक अथवा जन्मदिन आदि के अवसर पर इस उपाय को सम्मिलित किया जा सकता है।

क्रमशः जारी -To be continued 

हर बार की तरह आज भी कामना करते हैं कि प्रातः आँख खोलते ही सूर्य की पहली किरण आपको ऊर्जा प्रदान करे और आपका आने वाला दिन सुखमय हो। धन्यवाद् जय गुरुदेव

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24 आहुति संकल्प सूची :

1 जनवरी 2022 के नूतन वर्ष में “गुरुदेव का वसंत पर्व 1986 का ऐतिहासिक प्रवचन: तृतीय भाग” वीडियो की अमृतवाणी का पयपान करने के उपरांत आनलाइन ज्ञानरथ परिवार के 7 समर्पित सप्तऋषियों ने यूट्यूब  की तकनीकी समस्या के बावजूद भी 24 आहुतियों का संकल्प पूर्ण कर हम सबका उत्साहवर्धन व मार्गदर्शन कर मनोबल बढ़ाने का परमार्थ परायण कार्य किया है। इस पुनीत कार्य के  लिए आप सब बहुत बहुत बधाई के पात्र हैं  और कामना करते हैं और परम पूज्य गुरुदेव की कृपा दृष्टि आप और आप सबके परिवार पर सदैव बनी रहे। वह आनलाइन ज्ञान रथ परिवार के सूझवान व समर्पित सहकर्मी देवतुल्य सप्तऋषि भाई बहन निम्नलिखित हैं l (1) संध्या बहन जी – 45, (2) डा.अरुन त्रिखा जी – 39,24, (3) प्रेरणा कुमारी बेटी – 37, (4) अरूण कुमार वर्मा जी – 31, (5) सरविन्द कुमार पाल – 30, (6) रेणुका बहन जी – 29, (7) मनीषा सिंह बहन जी – 24

उक्त सभी आत्मीय सूझवान व समर्पित सहकर्मी देवतुल्य भाइयों व बहनो को आनलाइन ज्ञान रथ परिवार की तरफ से बहुत बहुत साधुवाद, हार्दिक शुभकामनाएँ व हार्दिक बधाई। आदरणीय संध्या बहिन जी को सबसे अधिक अंक प्राप्त करके स्वर्ण पदक विजेता होने की स्पेशल बधाई।


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