ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के समक्ष प्रस्तुत है रिपोर्ट कार्ड 

7 दिसंबर  2021 का ज्ञानप्रसाद – ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार के समक्ष प्रस्तुत है रिपोर्ट कार्ड 

लगभग 16 दिन बाद आज हम अपने परिवार के समक्ष सफलताओं ,असफलताओं , भावी योजनाओं का व्यौरा लेकर प्रस्तुत हुए हैं। ऑनलाइन ज्ञानरथ परिवार की समस्त योजनाओं में उस दिव्य सत्ता,जिसे हम सब परमपूज्य गुरुदेव के नाम से जानते हैं, का ही मार्गदर्शन है। परमपूज्य गुरुदेव इस ज्ञानरथ के सारथि हैं जिसे वह दिनोदिन गतिशील किये जा रहे हैं। हम सबका यह परम सौभाग्य है कि हम इस विशाल महायज्ञशाला में अपने कमैंट्स की आहुतियां अर्पित करते हुए पुण्य प्राप्त कर रहे हैं। सभी सहकर्मियों के उत्साह को देखते कई बार अश्रुधारा रुके नहीं रूकती। न दिन देखा जा रहा है न रात ,सभी ऐसी श्रद्धा और समर्पण से परमपूज्य गुरुदेव के चरणों में अपने श्रद्धा सुमन अर्पित कर रहे हैं कि क्या लिखें। कल रात के 2 बजे विनीता जी ने कमेंट लिया ,हमने पुछा भी कि -इस समय तो रात के दो बजे हैं। सरविन्द भाई जी का तो कहना ही क्या ! हमने कई बार कहा है कि आप आराम से नींद पूरी कीजिये ,संकल्प सूची हम स्वयं तैयार कर लेंगें लेकिन उनका हर बार यही -उत्तर आता रहा है -यह सौभाग्य पता नहीं फिर कभी मिलेगा भी कि नहीं। 

लेख पढ़ने की बात करें तो आदरणीय अरुण वर्मा जी सबसे पहले पढ़ने वालों में से एक हैं, हमने उन्हें भी बहुत बार कहा है कि नींद पूरी करना भी उतना ही आवश्यक है जितना गुरुकार्य। नींद ख़राब करके ज्ञानप्रसाद का अमृतपान करना कोई ठीक बात नहीं है। हमारा प्रयास रहता है कि आप को सूर्य की पहली किरण के साथ इस अमृतपान का सौभाग्य प्राप्त हो। लेकिन इतनी संतुष्टि है कि ज्ञानप्रसाद को सम्पूर्ण सम्मान मिल रहा है। कमैंट्स-काउंटर कमेंट का सुझाव इसी दिशा में एक कदम था – सुनिश्चित करना कि इतने परिश्रम से लिखे जा रहे लेख पढ़े भी जा रहे हैं य बिना देखे डिलीट करके recycle bin (dust bin ) में फेंके जा रहे हैं। परमपूज्य गुरुदेव के साहित्य के साथ अनादर होना हमारे लिए प्राण त्यागने जैसा होगा, क्योंकि हमारे गुरु ने एक -एक शब्द अपनी अंतरात्मा के स्तर से लिखा है और सदैव आशा की है कि अधिक से अधिक परिवारजनों की आत्मा में वास कर सकें। अखंड ज्योति हो ,हमारी वसीयत और विरासत हो य सुनसान के सहचर, जिस भी कृति को उठा कर देखें तो एक एक शब्द मन्त्र की तरह है -नमन है ऐसे गुरु को ,ऐसे चिंतक को ,विचारक को ,दार्शनिक को ,संत को ,पिता को ,संरक्षक को — l 

हम सभी को हमारे सोशल मीडिया पर एक दिन में पता नहीं कितने ही मैसेज आते होंगें ,बहुतों को तो अक्सर बिना देखे ही डिलीट किये जाते हैं य बिना देखे आगे आगे फॉरवर्ड किये जा रहे हैं। ऑनलाइन ज्ञानरथ का उद्देश्य कोई नंबर गेम नहीं है। इसलिए केवल एक ही लेख प्रस्तुत किया जाता है। यही नहीं , पढ़ने के लिए 15-20 घण्टे का समय भी दिया जाता है – लेख की लंबाई भी इतनी रखी गयी है कि लेख और कमेंट दोनों के लिए अधिक से अधिक 10-15 मिंट से अधिक समय न लगे। यह इसलिए है कि हमें अपनी पात्रता का ज्ञान है – अगर पात्र छोटा हो तो ज्ञान overflow होकर बाहिर गिरता है। हमें अपने सहकर्मियों के समय और बाकी दिनचर्या का भी पूरी तरह से ज्ञान है। हम अगर कोई वीडियो बनाते हैं तो उसे अपलोड करने से कई दिन पूर्व आपको बताते आते हैं ताकि आप उस वीडियो को भी उतना ही सम्मान देते हुए कमेंट करें जितना लेख को देते हैं ,इसीलिए उस दिन लेख पोस्ट नहीं होता। और जब “अपनों से अपनी बात” होती है तो न कोई लेख, न कोई वीडियो, केवल पारिवारिक चर्चा। यह शिक्षा और ट्रेनिंग हमने रोज़मर्रा के जीवन से ही प्राप्त की है -सम्मान -सम्मान केवल सम्मान। अगर फ़ोन भी करते हैं तो केवल फ़ोन ही करते हैं न कि चार काम और कर रहे होते हैं। आप सभी ने 50-60 हज़ार मेंबर्स वाले फेसबुक ग्रुप य अलग अलग नामों से कई -कई व्हाट्सप्प ग्रुप अवश्य ही देखें होंगें। HOW CAN THEY JUSTIFY ALL THIS ? -THEY CAN’T, THEY DON’T 

हमारे सहकर्मी हमारी कार्यशैली से अब तक भली भांति परिचित हो चुके होंगें, लेकिन फिर भी समय -समय पर पुराने पाठ दोहराने में कोई हर्ज़ नहीं होता। मानवी मूल्यों की पालना सुनिश्चित करना हम सबका धर्म एवं कर्तव्य है, इसीलिए यह एक बहुत ही छोटा समर्पित सदस्यों का परिवार है। विदुषी बहिन जी ने लिखा था: “यह छोटा सा समूह विस्तृत आकार लिए जा रहा है।” ऐसे कमेंट ऑनलाइन ज्ञानरथ रिपोर्ट कार्ड में HIGHLIGHT करने योग्य होते हैं। बहिन जी ने यह कमेंट स्वयं के समेत सभी सहकर्मियों के पुरषार्थ को मान्यता देते हुए लिखे हैं -बहुत बहुत धन्यवाद्, जय गुरुदेव बहिन जी। 

आने वाली योजनाएं :

प्रेरणा बिटिया द्वारा बनाई गयीं ऑडियो बुक्स:

29 नवम्बर को हमने आपसे कहा था कि हमारी सबकी स्नेहिल बिटिया प्रेरणा बेटी ऑडियो बुक लेकर आने वाली है। तो बहुत देर के प्रयास के उपरांत वह समय आ गया है। मनोनिग्रह की चल रही शृंखला के समाप्त होते ही हम ढाई-ढाई मिंट की दो ऑडियो बुक्स “अमृत वचन” अपलोड करेंगें। इस बच्ची ने इन क्लिप्स को बनाने में कितना परिश्रम किया ,कितनी बार हमसे ऑडियो/ वीडियो कॉल की, हम ही जानते हैं। बिहार ,भारत के वातावरण को देखते हुए बिना कालर माइक के यह रिकॉर्डिंग करना संभव ही नहीं हो पा रहा था। वाहनों के हॉर्न रात के समय भी इतना शोर मचाते हैं कि बेटी को कालर माइक खरीदने के लिए विवश होना पड़ा । परन्तु बेटी हर प्रकार से तत्पर थी, श्रद्धा जो ठहरी। यह हमारी बेटी का पहला प्रयास है और इस प्रयास को प्रोत्साहित करना हम सबका कर्तव्य है। LONG TERM में तो उसे बड़ी ऑडियो बुक्स बनानी हैं। सभी से करबद्ध निवेदन करते हैं कि अपने सुझाव देकर अपनी इस बेटी का मनोबल बढ़ाएं। जैसा हमने पहले भी लिखा है उस दिन ज्ञानप्रसाद में केवल यह दो ऑडियो क्लिप्स ही होंगी और आपको पास लगभग 15 -20 घंटे का समय होगा। 

शुभरात्रि सन्देश में लघु कथाएं :

अपने परिजनों को अच्छी नींद आये और वह फ्रेश होकर सुबह जगें, इस उद्देश्य से हमने शुभरात्रि सन्देश की क्रिया आरम्भ की, इस प्रयास का भी बहुत सम्मान हो रहा है ,धन्यवाद। हम पिछले कुछ दिनों से प्रेरणादायक लघु कथाएं भी पोस्ट कर रहे हैं। हम निवेदन करते हैं कि आपको कहीं से भी कोई अच्छी कहानी मिले तो हमें भेज दें और हम वही अगले शुभरात्रि सन्देश में आपके नाम से पोस्ट कर देंगें। याद रहे कि कहानी 300 शब्दों से अधिक न होने पाए और आप इसे हमारे जीमेल एड्रेस trikha48@gmail.com पर भेज सकते हैं।

आगामी लेखों की योजना:

सरविन्द भाई साहिब द्वारा प्रकाशित आदर्श परिवार लेखों की श्रृंखला का आरम्भ होना ,फिर संध्या बहिन जी के लेख और आजकल चल रहे अनिल भाई साहिब के मनोनिग्रह लेखों की श्रृंखला ने आप सबमें इतना उत्साह भर दिया है कि शब्दों में वर्णन करना संभव नहीं है। हमें ज्ञात था कि हमारे सहकर्मी बहुत ही प्रतिभाशाली हैं, हम सभी का धन्यवाद् करते हैं। अनिल भाई साहिब ने अपनी अगामी योजना “विचार परिवर्तन से व्यक्तित्व निर्माण” के अंतर्गत कुछ लेख लिख कर भेजे थे लेकिन हमने निवेदन किया कि अभी मनोनिग्रह लेख चल रहे हैं, बीच में ही अगर नए वाले लेख आने आरम्भ हो जायेंगें तो डर है कहीं मिक्स न हो जाएँ। फ़ोन की मेमोरी हैंग होने का भी भय था। साथ में अगर कोई पुस्तक ऑनलाइन उपलब्ध है तो लिखने का इतना कठिन कार्य करने की कोई आवश्यकता नहीं होनी चाहिए । अगर हूबहू कंटेट ( comma ,full stop के समेत ) प्रकाशित करना है तो लिखने से बहुत सी त्रुटियां add हो जाती हैं। इसके लिए और बहुत सारे सरल विकल्प उपलब्ध हैं। हमारे एक और सहकर्मी आदरणीय विवेक खजांची जी ने भी संगीत के विषय पर एक लेख लिख कर भेजा है ,उसके भी लगभग दो लेख बन सकते हैं परन्तु हम अभी इन लेखों को समझने का प्रयास कर रहे हैं। आदरणीय चिन्मय भैया ने परमपूज्य द्वारा लिखित पुस्तक “MUSIC, THE NECTAR OF MUSIC” हमें भेंट की थी ,उसका भी स्वाध्याय कर रहे हैं। यह सब कहने का उदेश्य यही है कि अगर किसी सहकर्मी के मन में लिखने की योजना है तो वह हमसे पहले बात कर ले, कहीं उसका परिश्रम व्यर्थ न जाए। ऑनलाइन ज्ञानरथ का फोकस अधिकतर परमपूज्य गुरुदेव य उनसे सम्बंधित साहित्य को सरल करके प्रकाशित करना है ताकि अधिक से अधिक परिजन गुरुदेव के विचारों का लाभ उठा सकें। हमें तो कई बार विचार आता है कि यदि हम केवल अखंड ज्योति पर ही लेख लिखें तो कई हज़ारों में बन सकते है ,एक एक एडिशन में दिव्यता का वास है। 

अंत में यही निवेदन करेंगें कि अगर कोई योजना है तो अभी से स्वाध्याय आरम्भ करना बेहतर होगा और पुस्तक ऑनलाइन उपलब्ध हो तो बहुत ही अच्छा होगा। 

धन्यवाद् जय गुरुदेव

अगला लेख: हताशा से बचो

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24 आहुति संकल्प सूची :

आज के लेख में 24 आहुतियों का संकल्प पूर्ण करने वाले 9 सूझवान व समर्पित नवरत्न सहकर्मियों को आनलाइन ज्ञान रथ परिवार की तरफ से बहुत-बहुत साधुवाद व हार्दिक शुभकामनाएँ व हार्दिक बधाई हो और वह विजेता सहकर्मी हैं : (1) नीरा बहन जी – 36, (2) सरविन्द कुमार पाल – 35, (3) प्रेरणा कुमारी बेटी – 28, (4) डाlअरुन त्रिखा जी – 26, (5) रेनू श्रीवास्तव बहन जी – 26, (6) अरूण कुमार वर्मा जी – 25, (7) संध्या बहन जी – 25, (8) रजत कुमार जी – 25, (9) पिंकी पाल बेटी – 25

उक्त सहकर्मियों पर आद्यिशक्ति जगत् जननी माँ भगवती गायत्री माँ की असीम अनुकम्पा सदैव बरसती रहे यही आनलाइन ज्ञान रथ परिवार की गुरु सत्ता से विनम्र प्रार्थना व पवित्र शुभ मंगल कामना है l धन्यवाद l जय गुरुदेव 

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