Leave a comment

समय का सदुपयोग ,परमपूज्य गुरुदेव के मार्गदर्शन में 

 9 अक्टूबर 2021 का ज्ञानप्रसाद – समय का सदुपयोग ,परमपूज्य गुरुदेव के मार्गदर्शन में 

https://youtu.be/7eiihNUnq5Y

आज के लेख के साथ हम एक वीडियो लिंक शेयर कर रहे है जिसमें आपको “समय” की philosophical परिभाषा मिलेगी। अधिकतर लोगों ने यह वीडियो देखी है,पसंद भी की है। Megaserial महाभारत के पात्र “समय” की आवाज़ देते हुए सुप्रसिद्ध voice over artist हरीश भिमानी की लगभग 4 मिंट की वीडियो आपकी  सुबह का  अवश्य ही सकारात्मक रूपांतरण कर देगी – ऐसा हमारा विश्वास है।   

हमारे आदरणीय सहकर्मी सरविन्द जी ने जब धीरप बेटे की अंतर्वेदना सुनी कि “लोग सुनते ही नहीं हैं और कहते हैं कि हमारे पास समय ही नहीं है” तो उनसे रहा नहीं गया और उन्होंने यह लेख लिख डाला। अखण्ड ज्योति फरवरी 2017 वाले  अंक के  स्वाध्याय/ विश्लेषण के उपरांत  प्राप्त मार्गदर्शन में किया गया यह सत्प्रयास अवश्य ही अधिक से अधिक परिजनों के लिए प्रेरणास्रोत होगा और नए सहकर्मियों को आकर्षित भी करेगा।    समय के न होने का राग अलापने वाले लोगों के लिए  हम तो यही कहेंगें कि यह केवल काम न करने का  एक बहाना है।  

हमारी सबकी एक मानसिक स्थिति है कि हम वोह काम करना चाहते हैं जो हमें  अच्छा लगता है , जिसमें हमारी  रूचि है।  कौन चाहेगा कि ऑनलाइन ज्ञानरथ के छ: लेख /प्रति सप्ताह  हर सुबह नियमितता से पढ़े जाएँ ,न केवल पढ़े जाएँ ,उनका विश्लेक्षण करके अच्छे से अच्छा कमेंट भी किया जाये क्योंकि हर कमेंट को पढ़ा जायेगा और इतना ही नहीं  counter -comment  भी आएगा।

“भाई साहिब  यह तो एक Full -time क्लास जैसा  टाइम टेबल हो गया।” 

जो लोग हमारे साथ नियमितता से जुड़े हैं हम  नतमस्तक होकर उनका धन्यवाद् करते हैं। उन्हें हमारा प्रयास अच्छा लगता है ,उनके दिल को छूता  है , हमारी लेखनी पसंद आती है ,  परमपूज्य गुरुदेव के प्रति उनकी  श्रद्धा , स्नेह और समर्पण है,और सबसे बड़ी बात है कि वह लम्बे समय से परमपूज्य गुरुदेव से जुड़े हैं ( कुछ नए भी अवश्य हैं )   

इस बात से भी इंकार तो नहीं किया जा सकता कि  समय की समस्या तो है ही लेकिन   उससे भी बड़ी समस्या श्रद्धा की है।  जिसे गुरुदेव के बारे में कुछ पता ही नहीं है, वह न तो नहीं करेगा , “समय नहीं है कह कर टाल  देगा”   धीरप बेटे की तरह इस विषय पर  हमारी भी चर्चा होती रहती है और हर किसी के पास  समय का बहाना सबसे बड़ा बहाना होता है। हम बहाना शब्द का प्रयोग बेझिझक कर  रहे हैं क्योंकि यह केवल बहाना ही है और कुछ नहीं।  ऐसे  विचार हरेक के  व्यक्तिगत हो सकते  हैं और हमें  ऐसे नकारात्मक विचारों पर न जाकर  अपने लक्ष्य पर निरंतर बिना किसी अवरोध के चलते रहना है ,अपने इष्ट व अपने भगवान परम पूज्य गुरुदेव के बताए हुए मार्ग का अनुसरण करते  ही रहना है। 

लेकिन सरविन्द भाई साहिब की बात भी शत प्रतिशत सही है कि बहानेबाज़ी के साथ साथ समय का सदुपयोग  सीखना भी आवश्यक है। तो आइये  समय के सदुपयोग की जन्म घुट्टी हमारे सबके  परमपूज्य गुरुदेव से ही प्राप्त करें। 

____________________________

समय का सही सदुपयोग :

परम पूज्य गुरुदेव ने कहा है कि समय का सही सदुपयोग करना बहुत जरूरी है अन्यथा आजीवन भटकते रहोगे और अपने जीवन को समाप्त कर नर्क के गर्त में चले जाओगे।  अतः समय को समझकर “समय का सदुपयोग करना” सीखो तभी अपने जीवन का कायाकल्प कर अपने आपको कृतार्थ कर सकते हैं।  समय हर पल हमारे साथ रहता है, हर क्षण रहता है, हम समय को भूल जाते हैं, लेकिन समय हमें कभी नहीं भूलता है और एक निश्चित समय पर समय हम सबका साथ छोड़कर चला जाता है, यही मृत्यु है, समय का अन्त हैI 

परम पूज्य गुरुदेव ने कहा है कि समय की शुरुआत हमारे जीवन से  होती है और अंत हमारी मृत्यु के रूप में होता है। जीवन और मृत्यु के बीच का समय हम सबको जीवन जीने के लिए मिला है, जिसका हम सब जैसा चाहें वैसा उपयोग कर सकते हैंI 

समय को समझिये :

अब बात आती है कि “हमारे पास समय नहीं है” अधिकतर  लोग अपनी अतिव्यस्तता को बताने के लिए ऐसा कहते नजर आते हैं और यह सच है कि हम सभी इस धरती पर एक सीमित समय के लिए हैं। हम तो यह भी नहीं जानते कि हमारे पास कितना समय  है, फिर भी समय का सही सदुपयोग न करके हम इस समय को और भी कम कर देते हैंI एक दिन में 24 घंटे का समय हमारे पास होता है लेकिन 24 घंटे हम काम नहीं कर सकते हैं इसमें से हम 6-7 घंटे नीद लेते हैं, कुछ समय हम नित्य के कार्यो में गुजारते हैं, कुछ समय हम मनोरंजन में बिताते हैं और कुछ समय यूं  ही गुज़ार  देते हैंI इस तरह हम अपने खास कामों  के लिए कुछ निश्चित समय ही निकाल पाते हैं जिसका यदि सदुपयोग न हो पाए तो वह भी बालू की भाँति फिसल जाता हैI  अतः कमी समय की नहीं, समय को समझने की हैI” समय को हम सभी जीते हैं, इसका आनंद लेते हैं, लेकिन कुछ लोग होते हैं जो  विशेष उपलब्धियाँ हासिल करते हैं और कुछ  ऐसा कर जाते हैं जो ऐतिहासिक होता हैI 

परम पूज्य गुरुदेव कहते हैं कि जिन लोगों ने समय को पहचान लिया और समय के साथ कदम-ताल करना सीख लिया, समय के साथ चलना सीख लिया वे ही अपने जीवन में आगे बढ़ पाते हैं क्योंकि समय की अपनी गति है और हम सबकी अपनी गति हैI दोनों में तुलना करने की जरूरत ही नहीं हैI हम समय से आगे-पीछे नहीं होते हैं बस, अपनी-अपनी गति से अपने-अपने समय को जी रहे होते हैं।  यदि हम सब अपने समय को भरपूर जी रहे होते हैं तो न ही हम सबको समय की कमी की शिकायत रहती है और न ही समय की कमी हम सबके आड़े आती हैI 

समय की गति :

परम पूज्य गुरुदेव कहते हैं कि यदि हम अपनी गति से चलते हुए समय पर मंजिल पा लेते हैं और हमारे सभी आवश्यक काम समय पर पूरे हो जाते हैं तो नैतिकता के आधार पर इसका मतलब है कि हम सब समय के साथ चल रहे हैं और समय हमारे साथ है Iलेकिन यदि हमारे पास हमारे आधे-अधूरे कामो की लम्बी सूची है तो फिर जरूरत है खुद को थोड़ा ठीक करने की, काम करने के तौर-तरीकों में बदलाव व सुधार करने की,योजनाओं के सही निर्धारण व उन पर अमल करने कीI इसके साथ ही हम सबको अपने जीवन में कुछ अच्छी आदतें अपना लेनी चाहिए जो हम सबको तरोताजा बनाती हों, ऊर्जा भरती हों, हम सबकी कार्य क्षमता को बढ़ाती हों तथा समय-प्रबंधन (Time- management )  में हम सबकी मदद करती हों I कार्य के दौरान बीच में विश्राम करने की आदत, हर दिन कुछ अच्छा पढ़ने की आदत, कुछ नया व अच्छा काम करने की आदत, संगीत सुनने की आदत आदि कुछ ऐसी अद्भुत आदतें हैं।  यह आदतें ऐसी होती हैं जो कि हम सबको तनावमुक्त करती हैं, भले ही हम सब चाहे कितने ही व्यस्त हों,लेकिन आदतवश इनके लिए हम थोड़ा-बहुत समय निकाल ही लेते हैं और अपनी कार्यशैली को एक नया आयाम देते हैंI उदाहरण के लिए आस्ट्रेलिया के पूर्व प्रधानमंत्री जान हावर्ड की एक अच्छी आदत थी कि हर दिन वह एक घंटे पैदल चलते थे, चाहे वह दुनियां के किसी भी कोने में हों I यह उनका अपना निजी समय होता था और उनके लिए खास भी होता थाI वे कहते थे कि मुझे जो करना है, सो करना है, दिक्कत समय की नहीं, सोचने की होती है क्योंकि हम सब लोग ठीक से सोच ही नहीं पाते हैं कि हम सबको करना क्या है? 

हम सबके परम पूज्य गुरुदेव नित्यप्रति अखण्ड ज्योति के लिए लेखनकार्य करते थे, इसी बीच लोग उन्हें प्रणाम करने आते थेI प्रणाम में आने वाले लोगों से सम्पर्क स्थापित करना और लेखन का कार्य करना, दोनों उनके साथ-साथ चलते रहते थे और इन्हें परम पूज्य गुरुदेव बड़ी ही सक्रियता व सहजता के साथ करते थेI यह है Time-Management .

परम पूज्य गुरुदेव अपने ही कमरे में पैदल चलकर 2 मील की पदयात्रा पूरी कर लेते थे, इसके लिए उन्होंने  अपने कदम गिन रखे थेI समय से वे सो जाते थे और समय से वे ब्रह्मुहुर्त में उठ भी जाते थेI कितने भी लोग कमरे में मौजूद हों, उन्हें न सोने में  कोई परेशानी  होती थी और न ही उठने में  क्योंकि उनकी  दिनचर्या व्यवस्थित, संयमित व नियमित थी। 

उपासना,साधना ,आराधना तथा स्वाध्याय आदि का क्रम इसी  दिनचर्या में था I इस दिनचर्या को वे भरपूर ऊर्जा के साथ पूरा करते थे और जो लोग भी परम पूज्य गुरुदेव से मिलते,  ऊर्जा से ओतप्रोत हो जाते और लोगों को उनके समीप रहने पर एक अजीब सी खुशी मिलती थी I परम पूज्य गुरुदेव ने समय को कभी बरबाद नहीं किया और उसे पहचाना व उसका सदुपयोग किया और परिणाम हम सबके सामने हैI 

Slow and Steady wins the race :

कछुए और खरगोश की कहानी हम सबने अवश्य ही पढ़ी होगी। कुछ लोग बहुत तेज गति से काम करते हैं और इसे बहुत अच्छा मानते हैं, इससे उनके समय की बचत होती है, काम जल्दी पूरा हो जाता है लेकिन तेज गति से काम करने से अधिक अच्छा, उस काम को प्रभावी तरीके से करना होता हैI जब ध्यान केवल गति पर होता है तो एक्सीडेंट  की आशंका बढ़ जाती है लेकिन जब अच्छी ड्राइविंग होती है तो अपने लक्ष्यों को पूरा करने के साथ दूसरों की भी मदद होती है I हम सबके जीवन में कुछ काम बहुत जरूरी होते हैं और कुछ काम कम जरूरी होते हैं, लेकिन इन सब कामों के  बीच भी हम सबको कुछ समय अपने लिए जरूर निकालना चाहिए जिससे कि हम सब भौतिक उन्नति के साथ आत्मिक उन्नति भी कर सकें।  जो भौतिक उपलब्धियाँ हमें मिलती हैं, उन्हें दुनियां देखती है, उनकी सराहना करती है, लेकिन अपनी आत्मिक उन्नति हम, केवल हम  स्वयं ही  देखते हैं, अनुभव करते हैं। यही आत्मिक उन्नति हमारी उन्नति-प्रगति का मूल स्रोत होती हैI 

इसलिए आवश्यक है कि हमें  अपने लिए कुछ समय  निकालना चाहिए, जिसमें हम उपासना, साधना,आराधना तथा स्वाध्याय आदि कर सकें I

एकाग्रता को साधना :

समय तो समय है, यह चलता ही रहेगा, इसे न कोई रोक पाया है न रोक पाएगा इसलिए “हमें समय को साधना चाहिए” लेकिन प्रसिद्ध विचारक डा. ली. जे. कोलन का कहना है कि हमें  समय को नहीं बल्कि अपनी एकाग्रता को साधना चाहिए। समय तो सबके लिए है एक जैसा है, एकाग्रता हर एक की अलग -अलग है। हमारे  हाथ में तो हमारी एकाग्रता ही  है और हम एक समय पर  किसी एक  चीज पर ही concentrate कर  सकते हैं।  इसलिए हमें  अपने आपको एकाग्र करना सीखना चाहिए I लेकिन हम सब अपनी जीवनशैली में इतने उलझे हुए हैं, इतने बिखरे हुए हैं कि किसी भी कार्य को सही तरीके से नहीं कर पाते हैं और समय का रोना रोते रहते हैंI

अतः हम अपने आनलाइन ज्ञान रथ परिवार के सभी आत्मीय सहकर्मियों से करबध्द अपील करते हैं कि “समय का सही सदुपयोग” तभी होगा, जब हम अपने कार्यो पर पूरी तरह से एकाग्र होना सीख जाएंगे क्योंकि आधे-अधूरे मन से किया गया कोई भी कार्य पूर्ण नहीं होता।  अपने आपको ऊर्जावान बनाना, कार्यकुशल बनाना भी समय का  सदुपयोग ही  है इसलिए समय-प्रबंधन में इन्हें भी स्थान देना जरूरी हैI 

तो मित्रो आज का लेख यहीं पर समाप्त करने की आज्ञा लेते हैं और कामना करते हैं कि सविता देवता आपकी सुबह को  ऊर्जावान और शक्तिवान बनाते हुए उमंग प्रदान करें। आप हमें आशीर्वाद दीजिये कि हम हंसवृत्ति से  चुन -चुन कर कंटेंट ला सकें। 

जय गुरुदेव

Leave a Reply

Fill in your details below or click an icon to log in:

WordPress.com Logo

You are commenting using your WordPress.com account. Log Out /  Change )

Google photo

You are commenting using your Google account. Log Out /  Change )

Twitter picture

You are commenting using your Twitter account. Log Out /  Change )

Facebook photo

You are commenting using your Facebook account. Log Out /  Change )

Connecting to %s

%d bloggers like this: