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सरविन्द कुमार जी  द्वारा रचित  ज्ञानदान सर्वश्रेष्ठ दान

1 अक्टूबर 2021 का ज्ञानप्रसाद – सरविन्द कुमार जी  द्वारा रचित  ज्ञानदान सर्वश्रेष्ठ दान 

जैसे हमने कल अपने सहकर्मियों को बताया था आज का ज्ञानप्रसाद हमारे सबके प्रिय और  आदरणीय सरविन्द कुमार भाई साहिब द्वारा रचित “ज्ञानदान सर्वश्रेष्ठ दान” है। भाई साहिब की लेखनी इतनी प्रभावपूर्ण है कि लेख प्रकाशित करने से पहले ही परिजनों ने इस विषय पर कमेंट करने आरम्भ कर दिए थे।  हर बार की तरह इस लेख में भी हमने एडिटिंग तो की ही है साथ में ही अपनी output  भी डाली है। ऐसा करने में हमारा प्रयास केवल लेख को और प्रभावशाली  और रोचक बनाने में होता न कि उनकी योग्यता पर किसी प्रकार की ऊँगली उठाना। आप हमारी output अवश्य ही पहचान जायेंगें ऐसा हमें विश्वास है।  आशा करते हैं कि सरविन्द कुमार जी  द्वारा किये गए ऐसे प्रयास से हर किसी को अपनी सुप्त प्रतिभा को जागृत करने की प्रेरणा मिलेगी।  ऑनलाइन ज्ञानरथ में  आपको सादर स्वागत है। 

शनिवार 2 अक्टूबर का ज्ञानप्रसाद एक बहुत ही छोटी सी वीडियो होगी। शिष्य शिरोमणि  परमपूजनीय शुक्ला बाबा की यह वीडियो हमारे दर्शकों को एक ऐसी जानकारी से अवगत कराएगी जिसका प्रमाण हम कितने ही दिनों से ढूढ़ रहे थे। हमारे चैनल का उदेश्य TRP बढ़ाना नहीं है।  बिना किसी  प्रमाण के कोई भी बात करना हानिकारक हो सकता है। 

रविवार को अवकाश होता है।  सोमवार को जो लेख प्रस्तुत करने की योजना है  उसे समझने के लिए हमारा एक पूर्वप्रकाशित लेख पढ़ने की आवश्यकता लग रही है।  यह पूर्वप्रकाशित लेख भी कुछ बड़ा ही था और हमने इस पर काफी परिश्रम किया था।  तो देखते हैं जिस लेख पर हम कई दिनों से रिसर्च कर रहे हैं कितने सफल होते हैं।      

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ॐ श्री गुरु सत्ताय नमः! अखिल विश्व गायत्री परिवार के संस्थापक व संचालक,हम सबके कुलपिता, वैज्ञानिक अध्यात्मवाद के पुरोधा,हम सबके प्रेरणा व ऊर्जा के केन्द्र युगऋषि, वेदमूर्ति, तपोनिष्ठ व युगद्रष्टा परम पूज्य गुरुदेव पंडित श्री राम शर्मा आचार्य जी के ज्ञान-प्रसार हेतु लिखे गए सत्साहित्य को नमन, जिनमें परम पूज्य गुरुदेव के प्राण बसते हैं। हम सबका सौभाग्य है कि सभी  पाठकगण व सहकर्मी भाई बहन ऐसे महान व्यक्तित्व के शिष्य हैं। 

परम पूज्य गुरुदेव ने कहा है :  ज्ञानदान सर्वश्रेष्ठ दान है अतः जो व्यक्ति अपनी दैनिक दिनचर्या समझकर हमारे साहित्य का नियमित स्वाध्याय करता है, उसे आत्मसात कर अपने जीवन में उतारता है और उसे घर-घर में जन-जन तक पहुँचाकर इस  ज्ञान का दान करता है वही हमारा सच्चा शिष्य है।  वैदिक काल से ज्ञानदान के  महत्व पर बल दिया जा  रहा है।  परम पूज्य गुरुदेव ने सदैव इस विचारधारा को अपने जीवन में उतारने पर बल दिया है। हम सभी सहकर्मी आनलाइन ज्ञान रथ परिवार के माध्यम से ज्ञान प्रचार -प्रसार  का ही काम कर रहे हैं। परम पूज्य गुरुदेव कहते हैं कि संसार का सर्वश्रेष्ठ  दान ज्ञानदान ही  है। यह एक ऐसा अमूल्य धन है जिसे चोर  चुरा नहीं सकते हैं और न ही  कोई इसे नष्ट कर सकता है। ज्ञान ही  एकमात्र ऐसा धन है जिसे  जितना बांटा जाए उतना ही बढ़ता  जाता है। 

इसका जीवित  प्रमाण हम आजकल के युग में इंटरनेट टेक्नोलॉजी  में प्रतिदिन देख रहे हैं। उदाहरण के तौर पर किसी ने  इंटरनेट पर कोई  Meme  य वीडियो अपलोड की /शेयर की।  यह वीडियो  एक exponential  तरीके से  इतनी स्पीड से फैल जाती है जिसे इंटरनेट की भाषा में  “वायरल हो जाना” कहा जाता है। पहले दिन सैकड़ों हजारों दर्शकों तक पहुंच गया, बीसवें दिन लाखों, और दो महीने से भी कम समय में करोड़ों लोगों ने इसे देख लिया। वायरल हो जाना वायरस से ही लिया गया है। विज्ञान और गणित के फॉर्मूलों से प्रमाणित सरल भाषा में कहा जा सकता है कि  एक व्यक्ति एक ही वीडियो  को एक साथ कई लोगों को शेयर करता  है  जो फिर इसे और भी अधिक लोगों तक फॉरवर्ड करते  हैं और इसी तरह बहुत ही  तेजी से लोगों तक पहुँचती जाती है।

यही है आज के युग की सबसे बड़ी ताकत – Power of  Internet . 

हम सौभाग्यशाली हैं कि इस युग की सबसे बड़ी शक्ति -इंटरनेट को हम प्रयोग करने में समर्थ हैं। क्या हम संकल्प लेते हैं कि गुरुदेव के विचारों को भी इसी प्रकार वायरल करेंगें। 

तो यह है ज्ञान का दान, एक ऐसा दान जो जितना किया जाये उतना ही बढ़ता जाता है,  निरंतर बढ़ता रहता है  और  लाखों लोगों को स्थायी सुख देता है -This is called exponential growth . 

परम पूज्य गुरुदेव कहते हैं कि मनुष्य  जितना समझदार है उससे कहीं अधिक नासमझ भी  है।  भगवान ने मनुष्य को सुन्दर मस्तिष्क दिया है जो उसे  सोचने-समझने-विचारने व चिन्तन-मनन की शक्ति देता  है जिसके बल पर मनुष्य असम्भव को सम्भव करने में समर्थ हो चुका है। मानव ने  अनेकानेक अविष्कारों के द्वारा सुख-सुविधाओं का ढेर लगा दिया है और अभी भी कहाँ रुक रहा है, परंतु ज्ञान का सदुपयोग कर सकने की विवेक-बुद्धि यदा-कदा लोगों में ही होती है। अधिकांश व्यक्ति तो नासमझ ही हैं और जो थोड़े बहुत समझदार हैं  उनमें भी अधिकतर व्यक्ति चिंतन और चरित्र की भ्रष्टता से, आलस्य व प्रमाद से, कुविचारों के दुराग्रह से बुरी तरह ग्रसित हैं। परम पूज्य गुरुदेव कहते हैं कि विद्वानों का, शिक्षितों  का  यह परम कर्त्तव्य है कि अज्ञान के अंधेरे में भटकते हुए इस समाज को ज्ञान के प्रकाश से सच्चा मार्ग दिखाने  में अपना योगदान दें।  किसी  निर्धन को रुपये-पैसे, कपड़े-लत्ते व खाने-पीने की सहायता कर देना तो ठीक है लेकिन इसका प्रभाव क्षणिक होता है। किसी  की  ज्ञान प्राप्त करने में सहायता करना  एक बहुत ही पुण्य का कार्य है। ऐसी सहायता  और पुरुषार्थ से  मनुष्य को सच्चा मार्ग मिलता है  और आत्मोन्नति करने की प्रेरणा मिलती है। यह एक ऐसी स्थायी सम्पत्ति है जिसका लाभ मनुष्य जीवनपर्यन्त उठाता रहता है और साथ ही साथ  इस सम्पत्ति में गुणात्मक वृद्धि भी होती जाती है , मन की मलीनता छँटती जाती है और अंतःकरण पवित्र होता जाता है। 

परम पूज्य गुरुदेव ने कहा है कि मनुष्य को  सबसे पहला ज्ञान अपनी जन्मदात्री माता की गोद में ही प्राप्त होता है। माता के स्नेह, प्यार, ममत्व एवं सौहार्द से अनुप्राणित शिशु  उसके आदेश को भी बड़ी तत्परता से मानता है।  यदि माताएं अपने उत्तरदायित्व को भली-भाँति निभाएं तो वह बच्चों  के मन में सदविचार जगाने के साथ-साथ सामाजिक बुराइयों व कुरीतियों के प्रति विद्रोह के बीज भी रोप सकती हैं। ऐसा करने से राष्ट्र  को  एक स्वस्थ, विचारशील तथा विद्वान नागरिक दे सकती हैं क्योंकि आज के बच्चे ही कल का भविष्य होते हैं , देश सुधार में उन्हीं की अहम भूमिका होती है।

आनलाइन ज्ञान रथ परिवार का प्रत्येक सहकर्मी ( वरिष्ठ ,युवा ,शिक्षित, अशिक्षित ,गृहिणी ,नर ,नारी ) परम पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक व क्रान्तिकारी विचारों के प्रचार -प्रसार  में  यथासम्भव सहयोग दे रहा है। साथ ही साथ जिस किसी के पास भी सुप्त  प्रतिभा  है और  साधन न उपलब्ध होने के  कारण इसे जागृत न कर सके ,ऑनलाइन ज्ञानरथ इस दिशा में बहुत ही श्रद्धा और समर्पण से कार्यरत है। हमारे सहकर्मियों ने स्वयं ही अनुभव किया होगा कैसे छोटे छोटे बच्चों ( शिशु भी ) की प्रतिभा को निखारने का अतुलनीय परमार्थ परायण कार्य किया जा  रहा है। इन सभी  गतिविधियों का सम्पूर्ण श्रेय परमपूज्य गुरुदेव के दिव्य मार्गदर्शन को तो जाता ही है , हमारे सहकर्मी भी बधाई के पात्र हैं।  इस विशाल कार्य में  हमारी भूमिका  तो केवल एक गिलहरी और रीछ की ही  है।  

यह एक सर्वविदित सृष्टि का नियम है कि कोई भी कार्य स्वार्थ के बिना नहीं होता। हर कोई कहता तो है कि हम निशुल्क,निस्वार्थ सेवा कर रहे हैं। 

यह कितना सत्य है ?  स्वयं  विचार कीजिये – 

हमारे कार्य को सराहते हुए आपके   रिप्लाई/कमेंट्स में व्यक्त की गयी  शुभकामनायें एवं आशीर्वाद, हमें वह ऊर्जा प्रदान करती हैं जिन्हें  शब्दों में वर्णन करना असम्भव है। हम आप सबका हृदय से आभार तो  व्यक्त करते ही  हैं लेकिन एक लालच की भावना भी हृदय के किसी कोने में आ जाती है।  हम आपसे केवल यही मांग करते हैं  कि इस ज्ञानदान के बदले में आप हमें समयदान, विचारदान, भावदान, श्रमदान अपनत्वदान, सहकारितादान, समर्पणदान, स्नेहदान, प्रेमदान,  अनुशासनदान,श्रद्धादान देकर कृतार्थ करें तो हम पर बहुत ही उपकार होगा। देखा न हमने  एक ज्ञानदान देकर आपसे कितना ही कुछ मांग लिया ,क्यों न मांगें यह हमारा हक़ भी तो है। 

महर्षि अरविंद ने  शिक्षा की पूर्णता के लिए पाँच पहलुओं पर बल दिया था जिनका  सम्बन्ध मनुष्य की पाँच प्रधान क्रियाओं से है-भौतिक, प्राणिक, मानसिक, अंतरात्मिक और आध्यात्मिक।  शिक्षा के यह पाँचों पहलू आपस में एक-दूसरे के पूरक हैं और जीवन के अंतकाल तक मनुष्य के व्यक्तित्व को पूर्णतः प्रदान करते हैं।  बचपन से ही इन पाँचों पहलुओं पर विशेष ध्यान आकर्षित किया जाना चाहिए।  इस प्रकार के ज्ञान से ही गुण-संवर्धन एवं आचार-विचार की स्थायी व्यवस्था बनती है और नर से नारायण, मानव से महामानव बनने का मार्ग प्रशस्त होता है। 

“यही है मनुष्य में देवत्व का उदय और धरती पर स्वर्ग का अवतरण” 

ज्ञान से ही मनुष्य की समझदारी बढ़ती है, जब समझदारी बढ़ेगी तो मनुष्य के अंतःकरण में ईमानदारी  जन्म लेकर बढ़ेगी , जब ईमानदारी बढ़ेगी तो मनुष्य में जिम्मेदारी की भावना आएगी, और जब  जिम्मेदारी आएगी तो बहादुरी अवश्य ही  आएगी।  समझदारी⇒ ईमानदारी⇒ ज़िम्मेदारी⇒बहादुरी 

इस तरह से  चारों qualities  एक साथ जुड़ी हुई हैं।  इन्ही qualities को ग्रहण करने से  मनुष्य में एक ऐसी  शक्ति उत्पन्न होगी जिससे वह  अनीति से लोहा ले सकेगा और दुष्प्रवृत्तियों, कुरीतियों, कुसंस्कारों तथा कुविचारों को समूल नष्ट करने के लिए मनोयोग या जीजान से निपटने को तैयार हो सकेगा। यही है  एक स्वस्थ, समुन्नत व पवित्र समाज के निर्माण की  भूमिका। 

परम पूज्य गुरुदेव के कथनानुसार जो दूसरों को विद्वान, सुशील और सदाचारी बनाने के लिए ज्ञानदान करता है वही सच्चा ब्राह्मण होता है और भगवान के सभी अनुदान-वरदान पाने का वही उत्तराधिकारी होता है। 

परम पूज्य गुरुदेव ने गायत्री परिवार के सभी आत्मीय परिजनों को इस विचारधारा को अपने जीवन में उतारने पर बल दिया है। आनलाइन ज्ञान रथ परिवार परम पूज्य गुरुदेव के सभी निर्देशों का अनुसरण करते हुए गुरु कृपा से निरंतर आगे बढ़ रहा है।  हमारे सभी  देवतुल्य भाइयों व देवीतुल्य बहनों व पुष्प समान बच्चों का सहयोग अतुलनीय है। हम सब पाठकगण व सहकर्मी भाई बहन आपस में मिलकर , आदरणीय अरुन भइया के साथ कंधा से कंधा मिलाकर परम पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक व क्रान्तिकारी विचारों को घर घर  पहुँचाने का  अनवरत प्रयास  कर रहे हैं ताकि  परमपूज्य गुरुदेव का  युग परिवर्तन का सपना साकार हो सके।आनलाइन ज्ञान रथ परिवार दिन प्रतिदिन गुलाब के पुष्प की तरह सुगंध बिखेरते  हुए  खिल रहा है। 

यह हम सबका परम सौभाग्य है कि आनलाइन ज्ञान रथ परिवार के माध्यम से परम पूज्य गुरुदेव के आध्यात्मिक व क्रान्तिकारी विचारों का ज्ञानदान करने का आशीर्वाद प्राप्त हुआ है और ऐसा सौभाग्य  किसी भाग्यशाली  को ही  मिलता है। We are the  chosen few selected  after a great process by our Guru  अवश्य ही पूज्यवर के साथ हमारा जन्म -जन्मांतरों का सम्बन्ध  है क्योंकि गुरुकृपा हर किसी को आसानी से नहीं मिल पाती – इतिहास साक्षी है।

तो मित्रो आज का लेख यहीं पर समाप्त करने की आज्ञा लेते हैं और कामना करते हैं कि सविता देवता आपकी सुबह को  ऊर्जावान और शक्तिवान बनाते हुए उमंग प्रदान करें। आप हमें आशीर्वाद दीजिये कि हम हंसवृत्ति से  चुन -चुन कर कंटेंट ला सकें। 

जय गुरुदेव

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