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शांतिकुंज में फरवरी 1986 का वसंत पर्व Part 1

ऑनलाइन ज्ञानरथ की ओर  से 1  मार्च 2021  की सुप्रभात एवं शुभ दिन की कामना 

फरवरी 1986  का वसंत एक ऐतिहासिक वसंत था। परमपूज्य गुरुदेव दो वर्ष की  सूक्ष्मीकरण साधना के उपरांत अपने बच्चों के समक्ष उद्बोधन कर रहे थे। अगर हम उस सारे के सारे उद्बोधन को आपके समक्ष प्रस्तुत करें तो एक लघु पुस्तिका ही बन जाएगी।  जैसे हमारे लेखों की प्रथा है कि हम आपको लेखों का source  अवश्य बतातें हैं , तो हमारे सहकर्मी गुरुवर की धरोहर पार्ट 1 में यह अविस्मरणीय लेख पढ़  सकते हैं।  

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 गुरुदेव बता रहे हैं :

वसंत पर्व पर हमें हमेशा नए संदेश मिलते रहे हैं। जिस सत्ता के साथ हमारा बड़ा घनिष्ठ संबंध है और जिसकी आज्ञा से हमारा सारा जीवन व्यतीत हुआ है, जिसको हमने अपने आप का समर्पण किया है, उस समर्पण वाली शक्ति ने हमसे यह वायदा किया था कि वसंत पंचमी के समय पर हर साल का एक कार्यक्रम बनाकर भेजा करेंगे। वह सुबह हमको मिल गया है। आप में से कई आदमी वसंत पंचमी पर यहाँ आए होंगे, पर वह भावावेश का समय था। दो वर्ष बाद हम आपको मिले हैं तो भावावेश की ही बातें हमने कहीं और आपको क्या करना है और हमें क्या करना है। इसके संबंध में एक छपा हुआ इश्तहार बाँट दिया। मालूम नहीं आपने ध्यान दिया अथवा नहीं। गुरुजी के साक्षात्कार हो गए, दर्शन कर लिए, बहुत कुछ  हो गया।

पिछले दिनों किसी ने वह अफवाह फैला दी कि गुरुजी बीमार पड़े हैं।  हमारे शरीर में कोई खराबी नहीं है और न कभी कोई खराबी होगी हमारे शरीर में। अगर कभी हमारी मृत्यु हुई तो आप यह समझना कि गुरुजी का ट्रांसफर हुआ है। किसी महत्त्वपूर्ण काम के लिए उनको भेज दिया गया है और जो काम अभी हम स्थूल शरीर से करते हैं उसकी अपेक्षा सौ गुना अधिक काम कर रहे होंगे, क्योंकि शरीर का बंधन ही ऐसा है जो  हमको बहुत दूर तक चलने नहीं देता। इसलिए जो काम अभी हम इस शरीर से नहीं कर सकते, उसकी अगर आवश्यकता पड़ी, हमारे  गुरुदेव को आवश्यकता पड़ी तो स्थूल शरीर से सूक्ष्म शरीर में बदल जाने के लिए  हम कुछ ऐसा  ही करें। 

अपने बच्चों की देखभाल की ज़िम्मेदारी हमारी :

बच्चों की हर ज़रूरत की ज़िम्मेदारी उनके माँ बाप पर होती है।  किसको क्या चाहिए ,क्या नहीं चाहिए इसका लेखा जोखा हर माता पिता के पास होता है। इसी तरह आपके देखभाल की, आपकी सुख-शांति की, आपको आगे बढ़ाने की, ऊँचा उठाने की, आपके दुःख-दर्द  को कम करने की जिम्मेदारी हमारी है। आपको कोई मुसीबत हो, हैरानी की बात हो तो माताजी से कह देना, अथवा जो कोई भी हों यहाँ हमने सात सदस्यों की एक कमेटी बनाई, ट्रस्ट बनाए हैं। ये ऐसे हैं जो अपने घर से ही अपना खर्च चलाते हैं, ऊँची योग्यता के हैं। यहाँ के कामों को बड़ी ईमानदारी और जिम्मेदारी से संभालते हैं और हमको यकीन हो गया है कि वे आदमी हमेशा अपनी जिम्मेदारियों को सँभालते रहेंगे। उनके सुपुर्द हमने यह कर दिया है कि जो कोई भी यहाँ आया करें, इनके हाथों लिख कर दे दिया करें, वह हम तक पहुंच जाएगा और हम आपका काम कर देंगे। यह हम आपसे वायदा करते हैं और आपको वचन देते हैं। हमने आपके लिए अपने व्यक्ति, अपने नुमाइंदे नियुक्त किए हैं, जो आपसे संबंधित बातों को ठीक से समझा सकें। जो बातें आपसे, आपके बाल-बच्चों से संबंधित हैं, आपके पैसे से संबंधित हैं, आपके शरीर से, आपके सुख और दुःख से संबंधित हैं, उसके बारे में हमारा जो वायदा है, जो दायित्व है, उसके बारे में ये आदमी आपको ठीक से समझा देंगे। अपने इन नुमाइंदों को हम आपकी सेवा में भेज रहे हैं।

एक बात हमने यह कही और आप सबको सावधान किया था कि आप लोग सावधान रहना। तो क्यों साहब! हमारे सावधान रहने से क्या हो जाएगा? मान लीजिए कोई ऐसी बीमारी आ जाए, मुसीबत आ जाए या बाढ़ आ जाए या कोई ऐसा उपद्रव खड़ा हो जाए तो हम क्या करेंगे? इसीलिए हमने कहा था कि अभी हम आपसे अलग नहीं हुए हैं। अभी हम आप से ज्यों-के-त्यों जुड़े हुए हैं। हमारी शक्ति के दो हिस्से जरूर हो गए हैं। अब तक जो शक्ति सीमित थी और गायत्री परिवार की शाखाओं में ही भरती जाती थी, संगठन करने या आयोजन करने या सम्मेलन बुलाने में, शिविर लगाने में खर्च हो जाती थी, अब दो साल की सूक्ष्मीकृत साधना में अपनी शक्ति को इस हिसाब से विकसित किया है कि पचास परसेंट शक्ति से हमारे पास जो अभी थोड़े-से 24  लाख व्यक्ति हैं  उनकी हम सुरक्षा कर लेंगे। पचास फीसदी शक्ति हम सुरक्षा में लगाएँगे। आपकी हारी-बीमारी में, घाटे में, दःख में, मुसीबत में, हैरानी में हमारी आधी शक्ति बराबर काम करती रहेगी। इसमें भी आप कमी नहीं पाएंगे, चाहे आप कैसी ही मुसीबत में क्यों न फंसे हों  आप हर हालत में नफे में रहेंगे, यह हमारा वायदा है और यह हमारा आपसे कहना है। एक और बात हमने यह कही थी कि अब आपको बार-बार हरिद्वार आने और बार-बार हमसे मिलने की आवश्यकता नहीं है। इसका बहुत सीधा सरल रास्ता हमने निकाल लिया है। वह यह है कि यदि हमसे मिलने की आवश्यकता हो तो आप इस बार लंबे-लंबे प्राणायाम करना और प्राणायाम करने बाद में सिर के ऊपर दाहिना हाथ फिराना। हाथ फिराने के बाद में देखना कि जो कुछ भी आपके मन में विचार थे, वह सबके सब बाहर निकल गए और हमारे विचारों का भीतर आना शुरू हो गया। उस वक्त जो विचार उठे उनको यह मान लेना कि यह गुरुजी की बात है, विचार है। यह रविवार के दिन करना चाहिए। हो सके तो नित्य करना चाहिए।

मित्रो , हम चाहते हैं कि जितने वजनदार कार्य हमारे हिमालयवासी   गुरुदेव ने सौंपें हैं उसके लिए हम समर्थ हो सकें।  वैसे तो हमारी शक्ति अपार  है लेकिन फिर भी हम चाहेंगें कि आप हमारी   ‘बैकिंग शक्ति’ (backing power ) बन जाएँ । हमारी पीठ पीछे वाली शक्ति आप होंगे। इसलिए इस वर्ष के सौंपे हुए जो काम हैं, उनको आप किस सीमा तक पूरा कर सकेंगे और किस सीमा तक पूरा नहीं कर सकेंगे, यह ध्यान रखना है। हमने हर वर्ष वसंत पंचमी पर संकल्प लिए हैं। अबकी बार हम आपसे संकल्प करने के लिए कहते हैं कि आप क्या करेंगे और अगले वर्ष आपका कार्यक्रम क्या होगा? बस, यही हमारा उद्देश्य था। इसी के लिए हमने आपको बुलाया था। अब जो यज्ञ होंगे उनमें आप लोगों को एकत्रित होकर के सामूहिक रूप से संकल्प लेने की उम्मीद और अपेक्षा कर रहे हैं। 

क्रमशः जारी ( To  be  continued )

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हमें   अपने सूझवान सहकर्मियों पर बहुत ही विश्वास और गर्व है।  कुछ सहकर्मी व्हाट्सप्प पर कमेंट करते हैं, उन कमैंट्स तो सार्वजनिक हम तभी करते हैं अगर सहकर्मी की स्वीकृति हो , नाम भी उनकी स्वीकृति के बाद ही सार्वजनिक किया जाता है।  लेकिन  YouTube  वाले कमेंट तो सार्वजनिक ही होते हैं ,कोई भी पढ़ सकता है।  वैसे तो हर कमेंट आदरणीय है लेकिन कुछ  एक बहुत ही प्रेरणादायक और ज्ञानवर्धक होते हैं।  हमारा सुझाव है कि इन कमैंट्स को भी पढ़ा जाये और उनके उत्तर दिए जाएँ।  इनसे बहुत अधिक ज्ञान प्रसार होने कि संभावना है। आखिर यह तो जाना माना तथ्य है कि ज्ञान प्रसार शेयरिंग से कितने ही गुना अधिक प्रसारित हो सकता है। और हमारा सौभाग्य है कि हम जिस आधुनिक  युग में रह रहे हैं sharing की  तो कोई समस्या ही नहीं है।  कितने ही सोशल मीडिया साइट्स पर हम सभी कनेक्ट हुए हैं।  जैसे गुरुदेव ने अपने हिमालय वासी गुरुदेव को संकल्प दिया आइये हम भी अपने गुरुदेव को संकल्प दें। हमें अपने  ऑनलाइन ज्ञानरथ के सहकर्मियों पर पूर्ण  विश्वस है। 

जय गुरुदेव 

परमपूज्य गुरुदेव और वंदनीय माता जी के श्री चरणों में समर्पित  

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